जलप्रपात की चेपट में डूबता असम

श्रीराजेश

 |  07 Aug 2026 |   9

जलप्रलय की चपेट में असम: बाढ़ से 97 की मौत,

लाखों बेघर और तबाही का मंज़र पूर्वोत्तर भारत का द्वार कहे जाने वाला असम इस समय एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की भीषण त्रासदी से जूझ रहा है। राज्य में नदियां उफान पर हैं, और बाढ़ की इस भयावह लहर में अब तक करीब 95 से 97 लोगों की अकाल मृत्यु हो चुकी है, जबकि लाखों नागरिक बेघर होकर राहत शिविरों या ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।

तबाही का फैलाव और मानवीय संकट

असम के दर्जनों ज़िले इस समय जलमग्न हैं। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियाँ खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं, जिससे हज़ारों गाँव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। लाखों हेक्टेयर खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रहार हुआ है। कई क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा ध्वस्त हो गया है—सड़कें बह गई हैं, पुल टूट चुके हैं और बिजली व संचार नेटवर्क ठप पड़ चुके हैं।

बाढ़ का प्रभाव केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं है। विश्वप्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है, जिससे एक-सींग वाले गैंडों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है।

राहत और बचाव कार्य

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और सेना की टुकड़ियाँ युद्ध स्तर पर बचाव अभियानों में जुटी हैं। नावों और हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है। प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी और दवाइयाँ वितरित की जा रही हैं, लेकिन प्रभावितों की विशाल संख्या को देखते हुए संसाधन भी कम पड़ रहे हैं। बाढ़ के पानी के उतरने के बाद जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) के फैलने की आशंका ने चिंताएँ और बढ़ा दी हैं।

वार्षिक त्रासदी और स्थायी समाधान की चुनौती

असम में बाढ़ कोई नई घटना नहीं है; यह हर साल आने वाली एक वार्षिक आपदा बन चुकी है। हालाँकि, जल जलवायु परिवर्तन (Climate Change), अनियंत्रित निर्माण और नदियों के तल में गाद (Siltation) जमा होने के कारण बाढ़ की तीव्रता और इसका विनाशकारी प्रभाव हर साल बढ़ता जा रहा है।

विश्लेषणात्मक दृष्टि से, केवल तात्कालिक राहत कार्य इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। असम को एक दीर्घकालिक और टिकाऊ रणनीति की आवश्यकता है, जिसमें नदियों की वैज्ञानिक ड्रेजिंग (Dredging), सुदृढ़ तटबंधों (Embankments) का निर्माण, और नदी घाटी प्रबंधन शामिल हो। जब तक बुनियादी ढाँचे और पर्यावरण-अनुकूल योजना का समन्वय नहीं होगा, तब तक हर साल असम का विकास इस उफनती बाढ़ के पानी में बहता रहेगा।


Browse By Tags

RECENT NEWS

To contribute an article to CULT CURRENT or enquire about us, please write to cultcurrent@gmail.com . If you want to comment on an article, please post your comment on the relevant story page.
All content © Cult Current, unless otherwise noted or attributed. CULT CURRENT is published by the URJAS MEDIA VENTURE, this is registered under UDHYOG AADHAR-UDYAM-WB-14-0119166 (Govt. of India)