वैश्विक मानकों से कदमताल करते नये भारत के एक्सप्रेसवे

श्रीराजेश

 |  08 Aug 2026 |   3

एक्सप्रेसवे क्रांति: कल का आधुनिक भारत,भारत में अवसंरचनात्मक ढाँचे का विस्तार केवल भौतिक सड़कों के निर्माण तक सीमित न होकर देश की आर्थिक प्रगति, रसद दक्षता (Logistics Efficiency) और क्षेत्रीय एकीकरण का सबसे बड़ा आधार बन चुका है। राष्ट्रीय राजमार्गों का आधुनिकीकरण और नए एक्सप्रेसवे कॉरिडोर्स का तेजी से हो रहा निर्माण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अपनी परिवहन प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के लिए प्रतिबद्ध है। गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान और भारतमाला परियोजना जैसी दूरदर्शी पहलों ने देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और निष्पादित करने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है।

इस आधुनिकीकरण का सबसे मुख्य स्तंभ 'एक्सेस-नियंत्रित एक्सप्रेसवे' (Access-Controlled Expressways) का जाल है, जो प्रमुख औद्योगिक शहरों, बंदरगाहों और कृषि केंद्रों को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान कर रहे हैं। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे और समृद्धिमार्ग जैसी विशाल परियोजनाएं यात्रा के समय को आधा करने के साथ-साथ ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी ला रही हैं। इन उच्च-गति गलियारों के निर्माण से लॉजिस्टिक्स लागत, जो वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तुलना में अधिक है, घटकर वैश्विक औसत के करीब आ रही है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं।

इंजीनियरिंग और तकनीक के मोर्चे पर, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 3D-जीपीएस गाइडेड कंस्ट्रक्शन, प्रीफैब्रिकेटेड कंक्रीट टेक्नोलॉजी और ड्रोन-आधारित निगरानी को अपनाकर निर्माण की गति और गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार किया है। इसके साथ ही, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS), स्वचालित टोल संग्रह (FASTag) और एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के माध्यम से राजमार्गों को केवल पक्की सड़कें बनाने के बजाय 'स्मार्ट हाईवे' में बदला जा रहा है। ये प्रौद्योगिकियाँ न केवल यात्रियों के अनुभव को सुगम बनाती हैं, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकने और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय को कम करने में भी निर्णायक सिद्ध हो रही हैं।

वित्तीय और सतत विकास की दृष्टि से, अवसंरचना क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और इनविट (InVITs) जैसे वित्तीय मॉडलों ने निजी निवेश को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया है। इसके अलावा, राजमार्ग निर्माण में हरित तकनीकों—जैसे प्लास्टिक कचरे का उपयोग, बंजर भूमि का पुनर्चक्रण और सड़कों के किनारे हरित पट्टियों (Green Belts) का विकास—को प्राथमिकता दी जा रही है। एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे 'लॉजिस्टिक्स पार्क्स' और औद्योगिक गलियारे ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को अभूतपूर्व प्रोत्साहन दे रहे हैं।

दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में, विश्वस्तरीय राजमार्ग नेटवर्क का यह निर्माण 'विकसित भारत' के संकल्प की नींव रख रहा है। निर्बाध कनेक्टिविटी न केवल व्यापार को सुगम बनाती है, बल्कि सुदूर क्षेत्रों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़कर समावेशी विकास को गति देती है। आधुनिकीकरण और त्वरित निर्माण की यह गति यह साबित करती है कि भारत का अवसंरचना क्षेत्र अब केवल घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश को 21वीं सदी की वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

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