समुद्र पार पहुंचेगी क्रिकेट की गूंज: अंडमान-निकोबार को BCCI सदस्यता की तैयारी
अजय पोद्दार अनमोल
| 27 Aug 2026 |
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भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) का दायरा सिर्फ मुख्य भूमि तक सीमित न रहकर अब देश के दूरदराज के हिस्सों तक फैल रहा है। बीसीसीआई द्वारा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को एसोसिएट सदस्यता (Associate Membership) देने पर विचार करना भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक और स्वागत योग्य कदम है। मुख्य भूमि से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित इस द्वीप समूह के लिए यह फैसला किसी सपने के सच होने जैसा है। लंबे समय से भौगोलिक अलगाव के कारण उपेक्षित रहे इस क्षेत्र को अब देश के सबसे अमीर और शक्तिशाली खेल बोर्ड की मुख्यधारा से जुड़ने का सुनहरा मौका मिल रहा है।
इस फैसले के लागू होते ही अंडमान-निकोबार में क्रिकेट के बुनियादी ढांचे का कायाकल्प होना तय है। बीसीसीआई की एसोसिएट सदस्यता मिलने से संघ को नियमित वित्तीय अनुदान, विश्वस्तरीय ट्रेनिंग सुविधाएं और अनुभवी कोच मिलेंगे। अब तक द्वीपों में सुविधाओं की कमी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के मैदान न होने से स्थानीय प्रतिभाएं दम तोड़ देती थीं। लेकिन अब बोर्ड के प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग से वहां आधुनिक क्रिकेट अकादमियों, टर्फ विकेटों और नेट प्रैक्टिस सुविधाओं का निर्माण होगा, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को अपनी क्षमताओं को निखारने का एक बेहतरीन मंच मिलेगा।
प्रतिभा के दृष्टिकोण से देखा जाए तो अंडमान-निकोबार में असीमित संभावनाएं छिपी हुई हैं। यहां के युवाओं में प्राकृतिक एथलेटिसिज्म, गति और सहनशक्ति की कोई कमी नहीं है। बीसीसीआई के इस कदम से इन युवाओं को रणजी ट्रॉफी, सी.के. नायडू ट्रॉफी और वीनू मांकड़ जैसी प्रतिष्ठित घरेलू प्रतियोगिताओं में खेलने का सीधा रास्ता मिलेगा। इसके अलावा, आईपीएल (IPL) की फ्रेंचाइजियों की नजरें भी अब इन सुदूर द्वीपों की प्रतिभाओं पर होंगी। हो सकता है कि आने वाले कुछ वर्षों में हमें अंडमान का कोई युवा तेज गेंदबाज या विस्फोटक बल्लेबाज देश का नाम रोशन करता दिखाई दे।
प्रशासनिक और सामाजिक नजरिए से भी यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। पूर्वोत्तर राज्यों को कुछ वर्ष पहले बीसीसीआई की सदस्यता दिए जाने के बाद जिस तरह वहां क्रिकेट का तेजी से विकास हुआ है, ठीक उसी तरह अंडमान में भी खेल संस्कृति को एक नया जीवन मिलेगा। खेल के इस जुड़ाव से द्वीप समूह के युवाओं का जुड़ाव राष्ट्रीय खेल धारा से और अधिक मजबूत होगा। साथ ही, राष्ट्रीय स्तर के मैचों के आयोजन से स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा मिलेगी, जिससे खेल और पर्यटन का एक सुंदर मेल देखने को मिलेगा।
निष्कर्षतः, अंडमान और निकोबार को एसोसिएट सदस्यता देना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट के समावेशी दृष्टिकोण का प्रमाण है। यह साबित करता है कि बीसीसीआई देश के हर कोने तक खेल की पहुंच बनाना चाहता है। हालांकि, असली चुनौती इस फैसले के बाद वहां जमीनी स्तर पर पारदर्शी प्रशासन और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की होगी। यदि बीसीसीआई और स्थानीय एसोसिएशन मिलकर सही रणनीति पर काम करते हैं, तो भारत के नक्शे के इस दूरस्थ हिस्से से उठने वाली क्रिकेट की गूंज आने वाले समय में पूरी दुनिया में सुनाई देगी।
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