कृषि विज्ञान केंद्र जोधपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने जेलू गांव के कृषि क्षेत्र में खेतों का भ्रमण कर किसानों को तिलहनी फसलों रायड़ा सरसों में पैदावार बढ़ाने के उपाय बताए. काजरी के अध्यक्ष डॉ. एस के शर्मा ने बताया कि जिले के 10 कृषि बाहुल्य गांवों को काजरी द्वारा राष्ट्रीय तिलहन उत्पादन परियोजना मिशन के अंतर्गत गोद लिया गया है. तिंवरी पंचायत समिति का जेलू गांव उनमें से एक है.
डॉ. शर्मा ने बताया कि कृषि वैज्ञानिक आर आर मेघवाल, एस एस तोमर विकास सैन के साथ किसानों के खेतों में जाकर काजरी द्वारा निशुल्क उपलब्ध करवाए गए सरसों, रायड़ा की फसलों का अवलोकन किया किसानों को पैदावार बढ़ाने के उपाय बताए. इस दौरान प्रगतिशील किसान दीपसिंह, मगसिंह तेजसिंह ने कृषि वैज्ञानिकों को बताया कि काजरी द्वारा उपलब्ध करवाए गए सरसों के बीज गिरिराज एन आर सी डी आर-2 किस्मों की जोरदार बढ़वार हुई है. डाॅ. शर्मा ने बताया कि गांव गोद लेने का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को पारंपरिक खेती में कृषि की नवीनतम जानकारी प्रदान करना है ताकि किसानों को खेती से अच्छी पैदावार मिले किसानों के लिए खेती एक लाभकारी रोजगार बने.
जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलराम सिंह चौधरी ने कहा कि जैविक खेती ही सब से उतम खेती है. जैविक खेती से भूमि की उर्वरा उतम खेती है. जैविक खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति खेती का टिकाउपन संभव है. कुलपति चौधरी बुधवार को मथानिया के लालसागर कृषि फार्म पर भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में आयोजित प्रांतीय जैविक अभ्यास वर्ग के समापन समारोह में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में जैविक कृषि उत्पादों की मांग बढ़ी है. भारत के किसानों का अब फिर जैविक खेती की ओर रूख बढा रहा है. उन्होंने जैविक खेती में हाइटेक तकनीकी अपनाकर कम लागत में अधिक पैदावार के तरीके बताए. इस दौरान भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष जुगलकिशोर मिश्रा, राष्ट्रीय जैविक प्रमुख रतनलाल डागा, क्षेत्रीय संगठन मंत्री कृष्णा मुरारी आदि किसान मौजूद थे.