कोरोना आपदा के कारण सबसे बड़ा संकट दिहाड़ी मजदूरों पर है. जिनके बारे देश के अंदर बहुत ही कम चर्चा हुई और इनकी आर्थिक सहायता के लिए देश की सरकार ने कुछ नहीं सोचा. कोई संदेह नहीं कि देश का मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा शोषण का शिकार है. कोरोना वायरस और लाकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों के लिए भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है. शहरों में रोजी-रोटी की तलाश में आने वाले मजदूर अपने-अपने गांवों में बंद हैं, खेती-बाड़ी में उनके लिए रोजगार पहले भी नहीं था और आज भी नहीं है .भूख से मर रहे दिहाड़ी मजदूरों के लिए जिम्मेवार कौन है ? देशभर में करोड़ों दिहाड़ी श्रमिक हैं. एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका निभाता है.
किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहमियत किसी से भी कम नहीं आंकी जा सकती. इनके श्रम के बिना औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना नहीं की जा सकती. दिहाड़ीर मजदूरों की गतिविधियों या डेटा के संग्रह को किसी कानूनी प्रावधान के तहत संजोकर नहीं रखा जाता है, मतलब ये कि सरकार इनका खाता नहीं रखती है. इन दिहाड़ी मजदूरों/अनौपचारिक / असंगठित क्षेत्र का जीडीपी और रोजगार में योगदान के मामले में भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रमुख स्थान है. देश के कुल श्रमिकों में से, शहरी क्षेत्रों में लगभग 72 प्रतिशत दिहाड़ीदार/अनौपचारिक क्षेत्र में लगे हुए हैं.
शहरी विकास में दिहाड़ीदार/अनौपचारिक क्षेत्र का महत्व बहुत ज्यादा है. भारत के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 500 मिलियन श्रमिकों के भारत के कुल कार्यबल का लगभग 90% अनौपचारिक क्षेत्र में लगा हुआ है. यही नहीं प्रवासी दिहाड़ी मजदूर न केवल आधुनिक भारत, बल्कि आधुनिक सिंगापुर, आधुनिक दुबई और हर आधुनिक देश का निर्माता है जो आधुनिकता की ग्लैमर सूची में खुद को ढालता है. भारत में शहरी अर्थव्यवस्था विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के अनुरूप है, जो अनौपचारिक श्रमिकों दिहाड़ी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र द्वारा लाइ गई है. देखें तो यही वो बैक-एंड इंडिया है जो आधुनिक अर्थव्यवस्था के पहियों को चालू रखने के लिए फ्रंट-एंड इंडिया को दैनिक जरूरत का समर्थन प्रदान करता है.
फैक्ट्रियां, औद्योगिक इकाइयां, होटल, रेस्तरां और कई अन्य प्रतिष्ठान, बड़े नाम और उनके प्रसिद्ध संचालकों के बावजूद ऐसे श्रमिकों या दिहाड़ीदारों पर ही निर्भर करते हैं. ये अलग-अलग कार्यों के लिए आते हैं. उबर और ओला ड्राइवर,राजमिस्त्री, बढ़ई, फूड डिलीवरी बॉय, पेंटर, प्लम्बर और कई अन्य हैं. भारत के भीतर श्रम प्रवास आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है और लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुधारने में योगदान देता है. प्रवासन आय में सुधार, कौशल विकास, और स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी सेवाओं तक अधिक पहुंच प्रदान करने जैसे कार्यों में मदद कर सकता है.
अर्थ संसार
भूख से मर रहे दिहाड़ी मजदूरों के लिए जिम्मेवार कौन ?
सामाजिक सुरक्षा कोष में तेजी लाने की आवश्यकता है ताकि देश के सबसे गरीब और कमजोर तबके को यह वित्तीय सुरक्षा की भावना प्रदान कर सके. एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका निभाता है. किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहमियत किसी से भी कम नहीं आंकी जा सकती. इनके श्रम के बिना औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
Cult Current
23 Oct 2020