अंतरराष्ट्रीय पटल पर मध्य-पूर्व का तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। फारस की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बीच आमने-सामने की स्थिति बनने से वैश्विक तेल बाजारों में हड़कंप मच गया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। यहाँ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या जहाजों की आवाजाही में रुकावट से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
यूरोपीय देशों और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं (विशेषकर भारत, चीन और जापान) ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों को सुरक्षित रखने की अपील की है।
तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC+) ने आपातकालीन बैठक का संकेत दिया है ताकि तेल आपूर्ति में आने वाली संभावित कमी की भरपाई के लिए उत्पादन रणनीति बनाई जा सके। आपूर्ति श्रृंखला टूटने के डर से ब्रेंट क्रूड के दाम लगातार ऊपर चढ़ रहे हैं।
यदि यह संघर्ष जल्द शांत नहीं हुआ, तो पहले से ही महंगाई से जूझ रही वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक और बड़ा झटका लग सकता है, जिससे कई विकसित और विकासशील देशों में मंदी की आशंका गहरी हो सकती है।