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मणिपुर में जनगणना बनाम एनआरसी विवाद

पहले जनगणना, फिर NRC?मणिपुर को जनगणना 2027 पर केंद्र के फैसले का इंतजार

कल्ट करंट डेस्क
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26 Aug 2026
Solar farm during sunset

मणिपुर में आगामी जनगणना प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मैतेई और नागा नागरिक समाज समूहों की मांग है कि राज्य में जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू किया जाए। इस विरोध के कारण 1 सितंबर से शुरू होने वाली मकान सूचीकरण (House Listing) प्रक्रिया के लिए प्रगणकों का प्रशिक्षण रोक दिया गया है।



मणिपुर हाई कोर्ट ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश एम. सुंदर की अध्यक्षता में एक विशेष पीठ का गठन किया है। वहीं, राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का इंतजार कर रही है।



मैतेई, नागा और अन्य जनजातीय समूहों का मानना है कि म्यांमार से होने वाली अवैध घुसपैठ ने राज्य के जनसांख्यिकीय संतुलन को बिगाड़ दिया है। उन्हें डर है कि यदि NRC के बिना जनगणना की गई, तो अवैध प्रवासियों का डेटा दर्ज हो जाएगा, जिससे भविष्य के परिसीमन (Delimitation) में उनका प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।



दूसरी ओर, कुकी-ज़ो (Kuki-Zo) समुदायों का तर्क है कि उनके खिलाफ फैलाए जा रहे जनसांख्यिकीय दुष्प्रचार को खारिज करने और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक निष्पक्ष जनगणना अत्यंत आवश्यक है। जातीय संघर्ष से जूझ रहे मणिपुर में यह गतिरोध स्पष्ट करता है कि राज्य में विकास और गणना की प्रक्रिया से पहले नागरिकता और पहचान का मुद्दा कितना संवेदनशील है।