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NEET-PG परीक्षा की चुनौतियां: पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

देश भर के 1,111 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित हुई NEET-PG (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट - पोस्ट ग्रेजुएट) परीक्षा भारतीय चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन रही।

कल्ट करंट डेस्क
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31 Aug 2026
Solar farm during sunset

देश भर के 1,111 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित हुई NEET-PG (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट - पोस्ट ग्रेजुएट) परीक्षा भारतीय चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन रही। लाखों युवा डॉक्टर, जिन्होंने वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद विशेषज्ञता (MD/MS) की डिग्री हासिल करने का सपना देखा था, इस परीक्षा में शामिल हुए। इतनी विशाल पैमाने पर परीक्षा का संचालन करना नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) के लिए एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा के समान था, जिसमें सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।



हालांकि, परीक्षा के दौरान जयपुर के एक परीक्षा केंद्र से आई अव्यवस्था की खबर ने इस राष्ट्रव्यापी आयोजन पर चिंता के बादल मंडरा दिए। जयपुर के इस केंद्र पर एनवक्त पर हुई गंभीर तकनीकी खराबी और कंप्यूटर सिस्टम्स के ठप्प हो जाने के कारण अभ्यर्थियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। परीक्षा के बीच में सर्वर डाउन होने से छात्रों में अफरा-तफरी मच गई और उनका महत्वपूर्ण समय नष्ट हो गया, जिससे अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश और निराशा फैल गई।



स्थिति की गंभीरता को देखते हुए और छात्रों के भविष्य से कोई समझौता न करने की नीति के तहत, प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए उस केंद्र की परीक्षा को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का साहसिक निर्णय लिया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए जल्द ही दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी और उन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाया जाएगा। यद्यपि इस निर्णय से छात्रों को राहत मिली, लेकिन इसने इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।



इस घटना ने एक बार फिर भारत में आयोजित होने वाली उच्च स्तरीय ऑनलाइन परीक्षाओं के सर्वर और टेक्निकल ऑडिट की आवश्यकता को रेखांकित किया है। डॉक्टर बनने की दहलीज पर खड़े अभ्यर्थियों के लिए हर एक मिनट तनावपूर्ण होता है। परीक्षा केंद्र पर ऐसी गड़बड़ियों से न केवल छात्रों का मानसिक एकाग्रता भंग होती है, बल्कि उनका समय और मेहनत भी दांव पर लग जाती है। विभिन्न छात्र संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा आयोजित करने वाली वेंडर एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए।



अंततः, NEET-PG जैसी उच्चस्तरीय परीक्षाओं में शत-प्रतिशत त्रुटिरहित व्यवस्था होना अत्यंत आवश्यक है। जयपुर की घटना एक सबक है कि केवल परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि प्रत्येक केंद्र पर बैकअप सर्वर और उच्च श्रेणी की तकनीकी तत्परता होना भी अनिवार्य है। उम्मीद है कि आगामी पुनरपरीक्षा बिना किसी बाधा के संपन्न होगी और मेधावी छात्रों को न्याय मिल सकेगा।