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ऑटोमोबिल सेफ्टी नियम: सड़क सुरक्षा में V2V तकनीक से डिजिटल क्रांति

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा भारत में निर्मित होने वाली नई कारों और वाणिज्यिक वाहनों के लिए व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन चिप्स को अनिवार्य करने का ड्राफ्ट मसौदा तैयार किया जा रहा है।

कल्ट करंट डेस्क
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08 Sep 2026
Solar farm during sunset

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा भारत में निर्मित होने वाली नई कारों और वाणिज्यिक वाहनों के लिए व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन चिप्स को अनिवार्य करने का ड्राफ्ट मसौदा तैयार किया जा रहा है। इस तकनीक के लागू होने से भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में एक नई तकनीकी क्रांति की शुरुआत होगी। यह कदम 2030 तक देश में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में 50% तक की कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्य से प्रेरित है।  

V2V तकनीक वायरलेस रेडियो फ्रीक्वेंसी (5.9 GHz बैंड) के माध्यम से एक निश्चित दायरे में मौजूद वाहनों के बीच रीयल-टाइम डेटा ट्रांसफर (जैसे गति, ब्रेक लगाने की स्थिति और स्टीयरिंग दिशा) को सक्षम बनाती है। यदि आगे चल रहे वाहन ने अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाए या अंधे मोड़ पर कोई वाहन खड़ा है, तो पीछे से आ रही कार का चालक उस खतरे को देखने से पहले ही डैशबोर्ड पर ऑडियो-विजुअल अलर्ट प्राप्त कर लेगा। यह तकनीक कोहरे, भारी बारिश या घने धुएं की स्थिति में भी उतनी ही सटीकता से कार्य करती है।  

भारत जैसे देश में, जहां दुनिया में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज की जाती हैं, V2V सुरक्षा मानकों को अपनाना अनिवार्य हो गया था। अब तक कारों में दी जाने वाली सुरक्षा मुख्य रूप से 'पैसिव सेफ्टी' (जैसे एयरबैग और एबीएस) तक सीमित थी, जो दुर्घटना होने के बाद प्रभाव को कम करती हैं। इसके विपरीत, V2V एक 'एक्टिव सेफ्टी' नेटवर्क तैयार करता है जो दुर्घटना होने की संभावना को ही पहले ही टाल देता है।  

औद्योगिक और आर्थिक दृष्टिकोण से, इस नियम को लागू करने के लिए वाहन निर्माताओं को अपने ऑन-बोर्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और चिपसेट सिस्टम में बदलाव करने होंगे। शुरुआती चरणों में प्रति वाहन विनिर्माण लागत में मामूली वृद्धि हो सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने पर यह तकनीक बेहद किफायती हो जाएगी। इसके अलावा, यह तकनीक भारत को भविष्य में ऑटोनॉमस (स्वचालित) वाहनों और स्मार्ट हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी तैयार करेगी।  

हालांकि, इस महत्वाकांक्षी नियम को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ मिलकर निर्बाध स्पेक्ट्रम का आवंटन और सभी ब्रांडों के वाहनों के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) सुनिश्चित करना एक मुख्य चुनौती होगी। यदि भारत इस डेडलाइन को हासिल कर लेता है, तो यह वैश्विक स्तर पर विकसित देशों के साथ खड़े होकर ऑटोमोटिव सेफ्टी में एक नई मिसाल कायम करेगा।