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72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स: राजधानी से बाहर एकता नगर (गुजरात) में ऐतिहासिक आयोजन

भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित '72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' समारोह का आयोजन इस बार ऐतिहासिक रूप से नई दिल्ली के विज्ञान भवन से बाहर गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में किया जाएगा

कल्ट करंट डेस्क
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08 Sep 2026
Solar farm during sunset

भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित '72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' समारोह का आयोजन इस बार ऐतिहासिक रूप से नई दिल्ली के विज्ञान भवन से बाहर गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में किया जाएगा। पुरस्कारों के 72 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका है जब यह भव्य समारोह राष्ट्रीय राजधानी से बाहर आयोजित हो रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के समीप स्थित इस नए स्थल पर विजेताओं को सम्मानित करेंगी।  

स्थान में यह बदलाव देश के प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रमों को राष्ट्रीय स्तर पर विकेंद्रीकृत करने की सरकार की नई नीति का हिस्सा है। विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के प्रांगण में इस पुरस्कार समारोह का आयोजन न केवल भारतीय सिनेमा की विविधता को एक नया कैनवास प्रदान करता है, बल्कि यह गुजरात को एक बड़े सांस्कृतिक और फिल्म-टूरिज्म हब के रूप में भी स्थापित करने में मदद करेगा।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में वर्ष 2024 की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को सम्मानित किया गया है, जिसमें राजनीतिक थ्रिलर 'आर्टिकल 370' ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का खिताब अपने नाम किया है। वहीं, मुख्य अभिनय श्रेणियों में मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार मम्मोटी ('भ्रमयुगम') और बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन ('चंदू चैंपियन') ने संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता है। यामी गौतम को फिल्म 'आर्टिकल 370' में उनके दमदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया।  

क्षेत्रीय सिनेमा के बढ़ते प्रभाव की झलक इन पुरस्कारों में स्पष्ट रूप से देखने को मिली है। तमिल ब्लॉकबस्टर 'अमरन' के लिए राजकुमार पेरियासामी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला, जबकि ब्लॉकबस्टर तेलुगु साइंस-फिक्शन 'कल्कि 2898 AD' को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का पुरस्कार मिला। इसके अलावा, अभिनेता रणदीप हुड्डा को फिल्म 'स्वतंत्र्य वीर सावरकर' के लिए बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का सम्मान दिया गया।  

एकता नगर में आयोजित हो रहा यह 72वां संस्करण भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। दिल्ली से बाहर सांस्कृतिक राजधानी का यह विस्तार न केवल देश के विभिन्न राज्यों की कला और पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के दृष्टिकोण के तहत भारतीय फिल्म बिरादरी को एक नए मंच पर एकजुट करेगा।