वाशिंगटन और नई दिल्ली के कूटनीतिक गलियारों से आज सुबह एक बेहद उत्साहजनक और बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के रणनीतिक समूह 'क्वाड' (QUAD) का अगला बहुप्रतीक्षित नेताओं का शिखर सम्मेलन अगले महीने नवंबर (15 से 17 तारीख के बीच) मनीला में आयोजित होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान यह पहला क्वाड लीडर्स समिट होगा।
अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को सुरक्षित करना, चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुकाबला करना और रक्षा तथा उन्नत तकनीकों में आपसी सहयोग को नई ऊँचाइयाँ देना है। पिछले कुछ समय से इस बात की चर्चा थी कि अमेरिकी प्रशासन द्विपक्षीय वार्ताओं पर अधिक ध्यान दे रहा है, लेकिन इस घोषणा ने क्वाड की प्रासंगिकता को फिर से साबित कर दिया है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह शिखर सम्मेलन भारत की विदेश नीति और हिंद-प्रशांत रणनीति के लिए एक बहुत बड़ी सफलता है। भारत हमेशा से इस बात पर जोर देता रहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र मुक्त, खुला, समावेशी और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित होना चाहिए। इस मंच के जरिए भारत अपने मित्र देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ कर सकता है।
आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर, इस सम्मेलन में सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (CET), और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को लेकर बड़े संयुक्त समझौतों पर मुहर लगने की संभावना है। भारत के तकनीकी विकास और विनिर्माण क्षेत्र के लिए यह साझेदारी बेहद फायदेमंद साबित होगी।

सुरक्षा कूटनीति के लिहाज से, यह बैठक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए एक मजबूत दीवार का काम करेगी। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का यह साझा मंच यह संदेश देता है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए लोकतांत्रिक देश एकजुट होकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

यह उच्चस्तरीय बैठक इस बात का प्रमाण है कि तमाम वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत अपनी रणनीतिक साझेदारियों को बहुत ही सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ा रहा है, जिससे वैश्विक पटल पर देश की कूटनीतिक साख और अधिक मजबूत हो रही है।
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