देश की राजधानी दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र से आज तड़के एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित एक चार मंजिला जूता निर्माण फैक्टरी में बीती रात अचानक भीषण आग लग गई। इस वीभत्स अग्निकांड में धुएँ और आग की लपटों में दम घुटने से 4 कामगारों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
दमकल विभाग की 20 से अधिक गाड़ियों ने मौके पर पहुँचकर कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और मलबे से 6 लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुँचाया। शुरुआती जाँच में यह बात सामने आई है कि इमारत में ज्वलनशील केमिकल, रबर और गोंद की भारी मात्रा मौजूद होने के कारण आग ने चंद मिनटों में ही पूरी इमारत को अपनी आगोश में ले लिया था।
भारतीय सामाजिक और औद्योगिक परिप्रेक्ष्य में यह भीषण हादसा महानगरों में स्थित औद्योगिक इकाइयों में अग्निशमन सुरक्षा मानकों (Fire Safety Norms) और आपातकालीन निकास प्रणालियों की घोर अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घने औद्योगिक क्षेत्रों में बेसमेंट और संकरी इमारतों में चल रही अवैध निर्माण इकाइयाँ मजदूरों के लिए मौत का कुआँ साबित हो रही हैं।
प्रशासनिक और कानूनी मोर्चे पर, दिल्ली पुलिस ने फैक्टरी मालिक के खिलाफ लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए अग्निशमन विभाग को शहर भर की फैक्टरियों का सुरक्षा ऑडिट करने के निर्देश जारी किए हैं।
श्रमिक संगठनों ने इस दुखद हादसे पर आक्रोश जताते हुए मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और दोषी उद्योगपतियों व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग उठाई है।
यह सनसनीखेज दुर्घटना यह कड़ा संदेश देती है कि औद्योगिक विकास की आड़ में मजदूरों की सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना किस कदर निर्दोष जिंदगियों को लील रहा है, जिस पर तुरंत सख्त प्रशासनिक एक्शन की दरकार है।
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