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एच-1बी वीजा और अप्रवासन

अमेरिकी 2026 के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद अमेरिकी टेक कंपनियों और भारतीय पेशेवरों के बीच आव्रजन नीतियों (Immigration Policies) को लेकर उम्मीद की नई किरण जगी है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
04 Nov 2026
Solar farm during sunset

अमेरिकी 2026 के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद अमेरिकी टेक कंपनियों और भारतीय पेशेवरों के बीच आव्रजन नीतियों (Immigration Policies) को लेकर उम्मीद की नई किरण जगी है। पिछले दो वर्षों में एच-1बी वीजा पर बढ़ाए गए सख्त वित्तीय शुल्क और कॉर्पोरेट प्रतिबंधों की समीक्षा के लिए संसद की न्यायिक समिति (Judiciary Committee) ने पहल करने के संकेत दिए हैं।  

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र और टेक पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा नियम अत्यंत संवेदनशील रहे हैं। संसद में नियंत्रण बदलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि कुशल प्रवासियों पर लगाए गए कड़े प्रशासनिक रोड़ों को हटाया जाएगा और रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की बैकलॉग सीमा को सुधारा जाएगा।  

भारतीय टेक दिग्गजों (जैसे टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो) के लिए अमेरिकी बाजार में अपने इंजीनियरों और सलाहकारों की तैनाती की प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी और सुगम हो सकती है। अमेरिकी सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियां भी संसद के इस रुख का समर्थन कर रही हैं, क्योंकि उन्हें कुशल प्रतिभाओं की भारी आवश्यकता है।

यह खबर यह दर्शाती है कि भारतीय प्रतिभा और वैश्विक टेक अर्थव्यवस्था के बीच का संबंध अमेरिका की आंतरिक राजनीति में भी कितना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

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