देश के पर्यावरण, कृषि अर्थव्यवस्था, नीली क्रांति (Blue Economy) और पूर्वोत्तर राज्यों से आज एक और गौरवशाली और ऐतिहासिक राष्ट्रीय खबर सामने आई है। सिक्किम का सोरेंग जिला (Soreng District) 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (PMMSY) के तहत आधिकारिक रूप से अधिसूचित होने वाला भारत का पहला 'ऑर्गेनिक फिशरीज क्लस्टर' (Organic Fisheries Cluster) बन गया है।
इस परियोजना के तहत बिना किसी रासायनिक दवाइयों, एंटीबायोटिक्स या हानिकारक कीटनाशकों का उपयोग किए बिना पूरी तरह से प्राकृतिक और पारिस्थितिकीय रूप से शुद्ध मछली पालन (विशेषकर अमूर कार्प और ट्राउट फिश) किया जाएगा।
भारतीय स्वास्थ्य और व्यापारिक परिप्रेक्ष्य में यह उपलब्धि देश के जैविक खाद्य उद्योग (Organic Food Industry) के लिए एक बहुत बड़ी छलांग है। आज जब बाजार में केमिकल्स से तैयार खाद्य पदार्थों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, सिक्किम ने कृषि के बाद अब मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी दुनिया को 100% प्राकृतिक और सुरक्षित उत्पादन का रास्ता दिखाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिक्किम के इस ऑर्गेनिक मॉडल से उत्पादित मछलियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होगी, जिससे स्थानीय किसानों और मछुआरों की आय में कई गुना वृद्धि होगी और सिक्किम का 'ऑर्गेनिक ब्रांड' वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगा।
यह ऐतिहासिक खबर यह साबित करती है कि पर्यावरण संरक्षण और जैव-विविधता की रक्षा करते हुए भी टिकाऊ और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है।
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