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व्यंग्यः कुड़िए.....मैंनूं भी कनाडा जाणा

सुबह-सुबह पड़ोसन चहकती हुई घर आ गईं. बताने लगीं कि अब हम भी विदेश जाएंगे. मैंने पूछा-¢कल तक तो आप विदेश जाने को मना करती थीं, अब अचानक क्यों.

मनोज बिसारिया
Cult Current
23 Jan 2017
Solar farm during sunset

सुबह-सुबह पड़ोसन चहकती हुई घर आ गईं. बताने लगीं कि अब हम भी विदेश जाएंगे. मैंने पूछा-¢कल तक तो आप विदेश जाने को मना करती थीं, अब अचानक क्यों. पड़ोसन फ़रमाने लगीं- वो क्या है कि अब हम अपनी ख़ुद की तय की गई उम्र के हिसाब से पासपोर्ट बनवा सकेंगी. पहले तो मुए असली डेट ऑफ़ बर्थ मांगते थे.....पता है तब फ़ॉर्म भरते तो कितनी शर्म आती. हमने तो इसी मारे कभी पासपोर्ट बनवाया ही नहीं. अब ठीक है आधार में जो लिखा दी, वही ठीक मानी जाएगी. सुषमा स्वराज ने बहुत अच्छा काम किया सच्ची.....



अब जाकर हमें मामला समझ में आया. अपने देश में अधिकतर महिलाएं तो इसी वजह से पासपोर्ट नहीं बनवाती थीं कि उसमें सही उम्र जो बतानी पड़ती थी. अब कौन महिला अपने को उम्रदराज़ बताना चाहेगी. नए नियम के अनुसार, आधार कार्ड, वोटर्स कार्ड पर लिखी उम्र भी मान्य होगी. वैसे होता यही है कि इन कार्डों पर जो उम्र छपकर आती है वह अक्सर बताई गई उम्र से या तो कम होती है या बहुत ज़्यादा. अधिक लिखी हो तो लोग भाग-दौड़ करके ठीक करवा आते हैं, कम लिखी आए तो कौन मूर्ख जाकर बड़ा बनने की जुगत लगाएगा.



अब अगर चालीस पार की महिला ये कहे जी....आई एम ओनली थर्टी....तो भैया मान लेने में हर्ज ही क्या है. वैसे उम्र में रखा ही क्या है. जिसको जो सूट करे वह अपने हिसाब से रख ले. उम्र छिपाने का रोग केवल महिलाओं में ही हो, ऐसा नहीं है. पुरुष भी अक्सर सामने वाली के हिसाब से अपनी ऐज एजस्ट कर लेते हैं.....तू पच्चीस की....मैं छब्बीस का. तू तीस की....मैं बत्तीस का.....और ये सिलसिला सेटिंग के हिसाब से ताउम्र चलता है.



लेकिन कुछ विघ्न-संतोषी टाइप एलीमेंट भी होते हैं जो अपनी तो सही बताएंगे ही ....अपने जानने वालों की भी बता जाते हैं. अजी....हम इतने के हैं और ये जो चश्मा लगाए, इतराता-सा खड़ा है....ये जी मुझसे पूरे दो साल बड़ा है. एक ही झटके में सामने वाली को आपकी उम्र के साथ-साथ आपके बालों के कालेपन का राज़ भी समझ आ जाता है. दूसरे ख़तरनाक एलीमेंट ये डॉक्टर-डूक्टर होते हैं. आप कितनी ही उम्र छुपाकर बताओ.....पट्ठे ताड़ ही लेते हैं. जी आप तो उम्र तीस बता रहे हैं.....घुटने में दर्द तो चालीस के पार होता है.....सच्ची बता दे तो इलाज करें. अब बंदा झींक कर या तो सही बता देगा या डॉक्टर ही बदल देगा. ये सरकारी कॉलोनियों में रहने वाले लोग भी बड़े ख़तरनाक होते हैं. आपस में बात भी करते हैं तो पूछ लेते हैं- अभी कितने साल बचे हैं रिटायर होने के. वो तो अच्छा है कि सरकार ने वीआरएस टाइप स्कीम शुरु की हुई है इसलिए हम जैसे बहुत से शर्मीले गर्वली बोल देते हैं- जी रिटायर न हुए....वीआरएस लिया है. वैसे तो अभी कई साल बाक़ी थे..... हमारा सुझाव है कि सरकार को ऐसे विघ्न-संतोषियों के ख़िलाफ़ कोई कड़ा क़ानून बनाना चाहिए. सामने वाले की सही उम्र पूछना.....मानहानि का आधार बनना चाहिए जिसमें मोटे मुआवज़े के साथ-साथ जेल का भी प्रावधान हो.



वैसे नोटबंदी के दौर में मनपसंद उम्र चुनने का मौक़ा किसी तोहफ़े से कम न है..... कितना अच्छा हो यदि सोशल मीडिया पर बताई गई उम्र को भी मान्यता मिल जाए.....बाईगॉड की क़सम मज़ा आ जाएगा. सुषमा जी सुन रही हैं न.......