माइक पोंपेयो अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रंल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के नए चीफ़ बने हैं. सोमवार को अमेरिकी सीनेट ने इस पर मुहर लगा दी कि माइक पोंपेयो सीआईए के नए निदेशक होंगे. पोंपेयो की पहचान रिपब्लिकन पार्टी में एक हार्डलाइनर की रही है.माइक पोंपेयो के पास बिज़नेस, खुफ़िया और आर्मी का पर्याप्त अनुभव है. माइक इस्लामिक कट्टरपंथ पर अपने आक्रामक निजी विचारों के लिए भी जाने जाते हैं. 2011 से माइक पोंपेयो कैंजस स्टेट से प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के सदस्य हैं.
उनकी पहचान कट्टर रूढ़िवादी रिपब्लिकन नेता की है. एक सासंद के रूप में वह बराक ओबामा की नीतियों के कटु आलोचक रहे हैं.माइक ने ईरान के साथ ओबामा प्रशासन के परमाणु समझौते का विरोध किया था. माइक ने नेशनल सिक्यूरिटी एजेंसी के लोगों का निजी डेटा जुटाने का भी समर्थन किया था.पोंपेयो ने ग्वांतानामो बे को बंद करने का भी विरोध किया था. ओबामा ने अपने चुनावी अभियान में इसे बंद करने का वादा किया था लेकिन अपने आठ साल के कार्यकाल में वह ऐसा नहीं कर पाए.
माइक पोंपेयो ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों को लेकर सीआईए की 2014 में हो रही आलोचना को भी सिरे से खारिज कर दिया था. पोंपेयो सीआईए की सख्त शैली के समर्थक रहे हैं. सीआईए के नए निदेशक मिलिटरी एकैडमी से स्नातक हैं. इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में रहते हुए माइक खुफिया आयोग और कई समितियों के सदस्य रहे.
माइक पोंपेयो इस्लाम को लेकर अपने रुख के कारण काफी विवाद में रहे हैं. उन्होंने कहा था कि देश के कुछ इस्लामी नेता चरमपंथी हमले को प्रोत्साहित करते हैं. पोंपेयो ने कहा था, ''अमेरिका में हुए ज़्यादातर विनाशकारी हमले पिछले 20 सालों में हुए हैं. इनमें से ज़्यादातर लोग एक धर्म के हैं. इन्होंने ये हमले धर्म के नाम पर किए हैं. इन हमलों को लेकर इस्लामी नेताओं को बोलना चाहिए लेकिन वो चुप रहते हैं.'' डेमोक्रेटिक पार्टी पोंपेयो को हिलेरी क्लिंटन के कट्टर विरोधी के रूप में देखती है. माइक पोंपेयो डोनल्ड ट्रंप की पंसद हैं. माइक ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध को कट्टर इस्लाम के ख़िलाफ़ ईसाई धर्म का युद्ध करार दिया था. उन्होंने 2014 में एक चर्च में कहा था कि अमेरिका को अल्पसंख्यक मुसलमानों से ख़तरा है. इसके साथ ही माइक ने ओबामा को मुसलमानों के प्रति उदार बताया था.