भाजपा के भीतरी सूत्रों का कहना है कि इस बार उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का उपराष्ट्रपति बनना तय है. पिछली बार भी आनंदी बेन पटेल का नाम उभरा था. पर आखिर कार वेंकेया नायडू को यह अवसर मिला. यह दक्षिण की राजनीतिक समीकरण की विवशता थी. पर इस बार शायद ऐसा न हो क्योंकि सूत्र बताते हैं कि आनंदी बेन से बकायदा भाजपा के सर्वोच्च नेतृत्व ने यह वादा किया है कि अगली उप राष्ट्रपति उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ही होंगी. उपराष्ट्रपति के चुनाव में अभी बहुत देर है. वर्तमान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त 2022 को समाप्त हो रहा है. जाहिर है आनंदी का नंबर उनके बाद आयेगा. ऐसे में इस तरह के संकेत और आश्वासन के मतलब सियासी हैं.
2017 में इस लिये आनंदीबेन को उपराष्ट्रपति बनाए जाने की बात हुई थी कि उसके जरिये गुजरात चुनावों में इसका फायदा मिल सकता था. आनंदी बेन खुद पटेल समुदाय से ताल्लुक रखती हैं. यह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से गुजरात का सबसे ताकतवर समुदाय है. इस बार एक तो उसकी भरपाई करनी है दूसरे इस पद के लिये गोलबंदी करने वाली सुमित्रा महाजन को यह संकेत देना है कि वे इस पद की आकांक्षा न पालें. आनंदी बेन पटेल को उनके पद पर बिठाने से ज्यादा यह कवायद सुमित्रा महाजन को उस पद से दूर रखने की कारगुजारी है.
आनंदीबेन पटेल ने मुख्यमंत्री पद से जब इस्तीफा दिया तो हालात यह थी कि वह भाजपा के लिये गुजरात में नुकसानदेह हो चुकी थीं. वैसे भी उनकी उम्र 75 की हो चुकी है. उनका राजनैतिक कैरियर समाप्तप्राय था ऐसे में भाजपा ने उन्हें राज्यपाल बना कर उबारा तो उसके पीछे भी वजह थी. अब अगर उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिये भरोसा दिया जा रहा है तो उसके भी कुछ गहरे निहितार्थ हैं. उल्लेखनीय है कि राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित और नामांकित सदस्य उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है. भले ही भाजपा तमाम राज्य हारती जा रही हो पर दोनों सदन के मत मिला कर उसे अपना मन पसंद उपराष्ट्रपति बनाना कोई मुश्किल नहीं है.
दिल्ली में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि, “भाजपा गुजरात के पिछले चुनावों में अपनी हालात देख चुकी है. अब अगले चुनाव से ठीक पहले वह उन आनंदी बेन पटेल का इस्तेमाल कर लेगी जिनका कोई और इस्तेमाल नहीं है. बीजेपी दगे हुए कारतूसों का इस्तेमाल अच्छी तरह जानती है.” फिलहाल तकरीबन तीन साल पहले ही आनंदी बेन पटेल के उपराष्ट्रपति बनने के खबरें खूब फैलाई जा रहे है.