नागरिकता संशोधन विधेयक पर फैली गहम गहमी के बीच कांग्रेस ने अपने जातीय समीकरण की गोटियां बिछाने का काम शुरू कर दिया है. अपने खोये जनाधार को वापस लाने की यह योजनाबद्ध कोशिश है. 2022 के अपने लक्ष्य की पूर्ति हेतु उसे जनधार मजबूत करना है और इसके लिये उसे न सिर्फ दूसरे दलों के जातीय समीकरणों में सेंध लगानी होगी, अपना समीकरण भी साधना होगा. इस मामले में कांग्रेस ने अपना पहला निशाना पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों पर लगाया है. कांग्रेस एक अभियान चला कर इन जातियों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करेगी और यह अभियान शुरू हो चुका है. अभियान मकर संक्रांति से ठीक पहले समाप्त होगा. अभियान के तहत प्रदेश के हर मंडल में जहां भी पिछड़ो और अति पिछड़ो की संख्या ज्यादा और प्रभावी है पार्टी वहां नुक्कड़ सभाएं, बैठक और क्षेत्रीय स्तर पर नेताओं, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से मिलेगी. पार्टी का प्रयास पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के अधिक से अधिक आबादी लो अपने से जोड़ने का होगा.
पार्टी ने यह रणनीति बहुत पहले से बना रखी है, इसके तहत नई कांग्रेस कमेटी में 45 फीसदी अधिकारी, सदस्य, पिछड़ी जातियों से शामिल किये गये हैं इनमें से भी अति पिछड़े वर्ग की संख्या पर्याप्त है जबकि 20 फीसदी दलित भी पार्टी की प्रादेशिक कमेटी में शामिल है. फिलहाल 29 दिसंबर को इलाहाबाद और 30 वाराणसी के अलावा 31 दिसंबर को मिर्जापुर, 2 जनवरी को आज़मगढ तथा 4 जनवरी को बस्ती, 5 जनवरी को फैज़ाबाद, 6 जनवरी देवीपाटन, 7 जनवरी को लखनऊ एवं 8 जनवरी को बरेली 9 जनवरी को मुरादाबाद के अलावा 10 जनवरी को सहारनपुर, 11 जनवरी को मेरठ और 12 को अलीगढ के साथ 13 को आगरा मंडल में पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति को प्रभावित कर पटाने के लिए कांग्रेस बैठकें करेगी. भाजपा और संघ की पिछड़ो के प्रति क्या अवधारणा और रवैया है यह कांग्रेसी नेता इन सभाओं में बखानेंगे. झारखंड की जीत से उत्साहित कांग्रेस बहुत जोश ओ जुनून के साथ इस कार्यक्रम में लगी हुई है.