दलाल स्ट्रीट (द बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज व नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) में बीते कारोबारी सत्रों में भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर कड़ा रुख अपनाने की आशंकाओं ने भारतीय निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार मुनाफावसूली ने बाजार की गिरावट को और तेज कर दिया है।
इस गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक और घरेलू व्यापक आर्थिक (Macroeconomic) कारक हैं। एक तरफ जहां वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनाव और सुस्त आर्थिक वृद्धि का डर बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ भारत में महंगाई के आंकड़े और आगामी तिमाही नतीजों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। विशेष रूप से बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर इस बिकवाली की सबसे गाज गिरी है।
शेयर बाजार की इस उठापटक का असर सीधे तौर पर खुदरा (Retail) और म्यूचुअल फंड निवेशकों पर पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए बाजार में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों का दायरा काफी बढ़ा है। बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव से नए निवेशकों में घबराहट फैलती है, जिससे कई बार वे घाटे में अपनी होल्डिंग्स बेचने की जल्दबाजी कर बैठते हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अल्पकालिक और एक स्वाभाविक करेक्शन (Market Correction) का हिस्सा है। भारत की बुनियादी आर्थिक स्थिति (Economic Fundamentals) अब भी दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी मजबूत बनी हुई है। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत खर्च (Capex) और कॉर्पोरेट जगत के बेहतर प्रदर्शन के चलते भारतीय बाजार की लंबी अवधि की संभावनाएं काफी सकारात्मक हैं।
ऐसे समय में निवेशकों के लिए सबसे समझदारी भरी रणनीति यह होगी कि वे घबराहट में निर्णय न लें। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के समय में मौलिक रूप से मजबूत (Fundamentally Strong) कंपनियों और डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड्स में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना लंबे समय में संपत्ति निर्माण (Wealth Creation) का सबसे सुरक्षित जरिया साबित होता है।