मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में कहिरी बांध के पास लासुड़िया खास गांव स्थित वॉटर फिल्ट्रेशन प्लांट से देर रात अचानक क्लोरीन गैस का रिसाव हो गया। जहरीली गैस फैलते ही आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया और कई लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में तकलीफ होने लगी। प्रभावित लोगों में से 4 की हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत सीहोर जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक व औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा मानकों में बरती जाने वाली घोर लापरवाही को उजागर करती है।
क्लोरीन गैस का इस्तेमाल पानी के शुद्धिकरण (Purification) के लिए किया जाता है, लेकिन अगर इसका रखरखाव या भंडारण सही तरीके से न हो, तो यह एक घातक रसायन साबित होती है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, टैंक या पाइपलाइन में खराबी के कारण गैस का यह रिसाव शुरू हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, डॉक्टरों और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को संभाला, जिससे समय रहते एक बड़ा भोपाल जैसा गैस हादसा टल गया।
यह हादसा केवल सीहोर तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि देश भर के कई शहरों में स्थित पुराने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की जर्जर स्थिति की ओर इशारा करता है। कई संयंत्रों में सुरक्षा अलार्म सिस्टम, ऑटोमैटिक कट-ऑफ वॉल्व और आपातकालीन रिसाव रोधी किट या तो खराब होते हैं या कर्मचारी उन्हें चलाने के लिए ठीक से प्रशिक्षित नहीं होते। रिहायशी इलाकों के करीब बने इन प्लांट्स में लापरवाही सीधे तौर पर सैकड़ों निर्दोष ग्रामीणों व नागरिकों की जान जोखिम में डालती है।
स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह तय किया जा सके कि गैस सिलेंडर या पाइपलाइन में रिसाव मानवीय भूल थी या तकनीकी खराबी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दोषी अधिकारियों और मेंटेनेंस का जिम्मा संभालने वाली एजेंसियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई जरूरी है। इसके साथ ही पीड़ित ग्रामीणों को बेहतर इलाज और मुआवजे का आश्वासन दिया गया है।
सीहोर का यह गैस रिसाव एक बड़ी चेतावनी है कि सरकार को जल आपूर्ति जैसे अति-आवश्यक विभागों में भी 'केमिकल सेफ्टी प्रोटोकॉल' का कड़ाई से पालन कराना होगा। नियमित सेफ्टी ऑडिट और कर्मचारियों की ट्रेनिंग के बिना इस तरह के साइलेंट किलर केमिकल कभी भी बड़े जन-धन के नुकसान का कारण बन सकते हैं।