भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए एआई-सुरक्षा गाइडलाइंस जारी किए हैं। इस नए ढाँचे का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से निर्मित 'डीपफेक' और भ्रामक जनरेटिव सामग्री के प्रसार को पूरी तरह रोकना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने तंत्र पर प्रसारित होने वाली फर्जी या भ्रामक खबरों की पहचान कर उन्हें तय समय-सीमा के भीतर नहीं हटाता है, तो उसे आईटी कानून के तहत मिलने वाली कानूनी छूट (Safe Harbour Protection) से वंचित कर दिया जाएगा।
मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को अब अनिवार्य रूप से एआई-जनरेटेड इमेज, ऑडियो और वीडियो पर दृश्य और अदृश्य 'वाटरमार्क' लागू करने होंगे। इससे आम यूजर को यह आसानी से पता चल सकेगा कि कोई कंटेंट असली है या उसे किसी एल्गोरिदम द्वारा निर्मित किया गया है। इसके अतिरिक्त, टेक कंपनियों को भारत में एक समर्पित एआई-शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया गया है, जो फर्जी कंटेंट की शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर उस पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
सरकार का यह कड़ा कदम देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, चुनावी निष्पक्षता और व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के दिनों में वरिष्ठ नेताओं, अभिनेताओं और उद्योगपतियों के एआई-निर्मित फर्जी वीडियो वायरल होने की घटनाओं ने डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। डिजिटल विशेषज्ञों ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे इंटरनेट पर सूचनाओं की विश्वसनीयता पुनः बहाल होगी और आम नागरिकों को साइबर फ्रॉड से बचाया जा सकेगा।
हालांकि, कई टेक प्लेटफॉर्म्स और प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स ने इन नियमों के सख्त समय-सीमा और तकनीकी कार्यान्वयन को लेकर व्यावहारिक चुनौतियाँ व्यक्त की हैं। कंपनियों का तर्क है कि हर सेकंड अपलोड होने वाले लाखों वीडियो और छवियों की वास्तविक समय (Real-time) में निगरानी करना एक बेहद जटिल कार्य है। इसके बावजूद, सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि डिजिटल सुरक्षा और यूजरों का अधिकार सबसे ऊपर है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष रूप में, भारत का यह नया डिजिटल फ्रेमवर्क वैश्विक स्तर पर एआई के नियमन के लिए एक नई मिसाल कायम कर सकता है। जहां एक तरफ देश डिजिटल क्रांति को बढ़ावा दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा और जवाबदेही तय करने का यह प्रयास एक सुरक्षित और पारदर्शी इंटरनेट इकोसिस्टम का निर्माण करेगा। आने वाले महीनों में सभी प्रमुख कंपनियों को इन नियमों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।