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डूसू चुनाव 2026 और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: छात्र राजनीति में हाई-टेक प्रचार का दौर

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 का प्रचार अभियान इस बार एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बन रहा है। कैंपस की दीवारों पर पारंपरिक कागजी पोस्टरों और बैनरों की जगह अब डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स ने ले ली है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
17 Sep 2026
Solar farm during sunset

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 का प्रचार अभियान इस बार एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बन रहा है। कैंपस की दीवारों पर पारंपरिक कागजी पोस्टरों और बैनरों की जगह अब डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स ने ले ली है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और अन्य छात्र संगठनों के उम्मीदवार इस बार मतदाताओं (छात्रों) को लुभाने के लिए AI जनरेटेड वीडियो, वॉयस क्लोनिंग और पर्सनल मैसेजिंग बोट्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

एनजीटी (NGT) और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सख्त नियमों के कारण कैंपस में कागजी बर्बादी पर रोक लगाने के लिए डिजिटल प्रचार अनिवार्य सा हो गया है। छात्र प्रत्याशी अब अपने वादों और घोषणापत्र (Manifesto) को दर्शाने के लिए AI आधारित अवतारों (Avatars) का उपयोग कर रहे हैं। उम्मीदवारों की आवाज में जनरेट किए गए स्वचालित वॉयस कॉल्स और एनिमेटेड रील्स व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे प्रचार की लागत में कमी आई है और पहुंच बढ़ी है।

इस हाई-टेक चुनाव प्रचार का सीधा असर दिल्ली विश्वविद्यालय के युवाओं पर देखने को मिल रहा है। टेक-सेवी पीढ़ी के छात्र इन अभिनव और एआई-संचालित अभियानों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि एआई के इस्तेमाल से वे प्रत्येक छात्र तक व्यक्तिगत रूप से अपनी बात पहुंचा पा रहे हैं, जो हॉस्टलों और कॉलेजों में जाकर व्यक्तिगत रूप से मिलने की सीमाओं को पार कर देता है।

हालांकि, चुनाव में एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने कुछ नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। डीपफेक और फर्जी वीडियो के जरिए विरोधी प्रत्याशियों की छवि खराब करने और भ्रामक जानकारी फैलाने का खतरा बढ़ गया है। इसके मद्देनजर विश्वविद्यालय प्रशासन और चुनाव अधिकारी सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल के जरिए चुनावी गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहे हैं ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।

निष्कर्ष के तौर पर, डूसू चुनाव 2026 में एआई का यह प्रयोग यह साबित करता है कि भारतीय छात्र राजनीति अब केवल नारेबाज़ी और शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह तकनीकी नवाचारों को अपनाने और नए जमाने की प्राथमिकताओं के अनुसार ढलने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो भविष्य के राष्ट्रीय चुनावों के लिए भी एक ट्रेंडसेट साबित हो सकता है।