छत्तीसगढ़ की विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने साल 2013 में हुए दर्दनाक झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 दोषियों को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। 11 साल पहले हुए इस भीषण हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सहित 30 से अधिक निर्दोष लोगों की बर्बरता से जान ले ली गई थी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए ठोस सबूतों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और फोरेंसिक रिपोर्टों का गहन अध्ययन किया। इसके आधार पर इन 10 अभियुक्तों को मुख्य साजिशकर्ता और हमले को अंजाम देने वाला दोषी पाया गया। अदालत ने माना कि यह एक पूर्व-नियोजित और अत्यंत क्रूर आपराधिक कृत्य था।
न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि यह अपराध 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला करते हुए निर्दोष लोगों और जन प्रतिनिधियों की हत्या करना समाज के खिलाफ एक अक्षम्य अपराध है, जिसके लिए दोषियों को कानून के तहत अधिकतम सजा मिलना आवश्यक है।
इस फैसले से झीरम घाटी कांड के पीड़ितों के परिवारों को सालों के लंबे और कठिन इंतजार के बाद न्याय मिला है। पीड़ित परिवारों ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया और इसे अपने खोए हुए परिजनों की आत्मा के लिए सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि इस न्याय से उनका कानून पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
सुरक्षा एजेंसियों और कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बस्तर और आसपास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कानून व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करेगा। यह निर्णय हिंसक गतिविधियों में शामिल तत्वों के लिए एक सख्त संदेश है कि लोकतंत्र में हिंसा फैलाने वालों को अंततः कानून के सामने झुकना ही पड़ेगा।