उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा ढाँचे को बड़ा झटका देते हुए हाल ही में निर्मित 4,200 करोड़ रुपये की लागत वाले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। इस घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार मुक्त दावों की पोल खोल दी है। गनीमत यह रही कि सड़क धंसने के समय कोई तेज रफ्तार वाहन उस स्थान से नहीं गुजर रहा था, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। इस गंभीर लापरवाही का कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रशासन और संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तत्काल सख्त कदम उठाए हैं।
सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को तत्काल प्रभाव से 3 साल के लिए प्रतिबंधित (Blacklist) कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी के खिलाफ वित्तीय जुर्माना लगाने और उसकी सुरक्षा निधि (Performance Security) को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य और केंद्र सरकार ने संयुक्त रूप से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में खराबी थी या फिर इंजीनियरिंग डिजाइन में कोई बड़ी चूक हुई थी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे दो प्रमुख शहरों के बीच यात्रा के समय को आधा करने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए तैयार किया जा रहा एक बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इतनी भारी-भरकम राशि से बने हाईवे का पहली ही बारिश या शुरुआती चरणों में धंस जाना न केवल जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी है, बल्कि यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ भी है। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अधिकारियों ने धंसे हुए हिस्से की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है ताकि यातायात प्रभावित न हो। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे के पूरे रूट की 'स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट' (संरचनात्मक सुरक्षा जांच) कराने का निर्णय लिया गया है। जांच के लिए आईआईटी (IIT) के विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है जो एक्सप्रेसवे की मिट्टी के भराव, ड्रेनेज सिस्टम और डामर की गुणवत्ता की विस्तृत जांच करेगी, और उसकी रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले इंजीनियरों व अधिकारियों पर भी सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला देश भर में चल रहे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता नियंत्रण पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। सरकार द्वारा निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की इस कठोर कार्रवाई से अन्य ठेकेदारों और कंपनियों को भी कड़ा संदेश गया है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही या घटिया सामग्री का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता की सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए ऐसे सख्त फैसलों को बेहद जरूरी माना जा रहा है।