मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक हृदयविदारक और प्रशासनिक उपेक्षा की खबर सामने आई है। प्रसिद्ध गांधी मेमोरियल अस्पताल में इलाज के दौरान एक प्रसूता (जच्चा) और उसके नवजात शिशु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) की मांग को लेकर निकटतम नदी के पानी में उतरकर अनिश्चितकालीन 'जल सत्याग्रह' शुरू कर दिया है।
परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने समय पर मरीज पर ध्यान नहीं दिया। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद क्रिटिकल स्थिति में महिला को अटेंड नहीं किया गया और ऑक्सीजन व इमरजेंसी इंजेक्शन की व्यवस्था में देरी की गई, जिसके कारण माँ और बच्चे दोनों ने दम तोड़ दिया। जब परिजनों ने विरोध जताया, तो अस्पताल के कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्रता की और शव को ले जाने का दबाव बनाया।
न्याय न मिलने से निराश परिजनों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर नदी के पानी में खड़े होकर सत्याग्रह शुरू कर दिया। कड़ाके की ठंड और पानी के बीच खड़े आंदोलनकारियों की मांग है कि जब तक जिम्मेदार डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज नहीं किया जाता और उन्हें निलंबित नहीं किया जाता, तब तक वे जल सत्याग्रह समाप्त नहीं करेंगे। इस अनोखे और कड़े विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं।
मामले के तूल पकड़ते ही जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) और पुलिस अधिकारी परिजनों को समझाने और सत्याग्रह खत्म कराने के लिए नदी तट पर पहुँचे। प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक तीन-सदस्यीय डॉक्टरों की समिति (Medical Board) का गठन किया है और आश्वासन दिया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं और कर्मचारियों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवार का समर्थन करते हुए पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और अस्पताल की अव्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग उठाई है। फिलहाल नदी तट पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस बल तैनात किया गया है।