अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक अत्यंत गंभीर सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है, जहाँ इटली के तीन नागरिक बिना अनिवार्य इमीग्रेशन क्लियरेंस प्राप्त किए ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सवार हो गए। इस घटना के उजागर होते ही नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो और हवाई अड्डा अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। जैसे ही विमान ने उड़ान भरी, ग्राउंड स्टाफ को डेटा मिलान के दौरान इस बात की जानकारी हुई, जिसके तुरंत बाद संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजा गया।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने आपातकालीन बैठक बुलाई और मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यह चूक इमीग्रेशन काउंटर पर तैनात कर्मचारियों की लापरवाही और बायोमेट्रिक चेकिंग सिस्टम में आई क्षणिक तकनीकी खराबी के कारण हुई। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इमीग्रेशन प्रक्रिया में चूक से देश की सीमा सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
हवाई अड्डे पर तैनात आव्रजन अधिकारियों और निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मियों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि यात्रियों को बोर्डिंग पास कैसे जारी किए गए और वे सभी सुरक्षा घेरों को पार करते हुए विमान तक पहुँचने में कैसे सफल रहे। क्या इसके पीछे केवल मानवीय भूल थी या किसी आंतरिक मिलीभगत की संभावना है, इस बिंदु पर भी गहनता से जांच की जा रही है।
जिस एयरलाइन के माध्यम से यात्रियों ने यात्रा की, उसे भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार, बोर्डिंग से पहले प्रत्येक यात्री के पासपोर्ट और इमीग्रेशन स्टाम्प की जांच करना एयरलाइन स्टाफ का भी कर्तव्य होता है। एयरलाइन की ओर से हुई इस गंभीर लापरवाही पर भारी जुर्माना लगाने और संबंधित क्रू एवं बोर्डिंग गेट कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
इस घटना के बाद देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सुरक्षा मानकों को तत्काल प्रभाव से कड़ा कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने सभी हवाई अड्डों पर 'ऑटोमेटेड बॉर्डर कंट्रोल सिस्टम' को और अधिक मजबूत करने तथा इमीग्रेशन प्रक्रियाओं को शत-प्रतिशत फुलप्रूफ बनाने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा में इस तरह की चूक भविष्य में न हो, इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में भी बदलाव किए जा रहे हैं।