सर्वोच्च न्यायालय ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) द्वारा ऋण (Loan) न चुका पाने वाले ग्राहकों से वाहनों की जब्ती को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि कोई भी वित्तीय संस्था या बैंक कर्जदार द्वारा किस्त जमा न करने पर भी जबरन, दादागिरी, चोरी-छिपे या गैर-कानूनी तरीके से वाहन की जब्ती नहीं कर सकता। शीर्ष अदालत का यह आदेश रिकवरी एजेंटों की मनमानी और गुंडागर्दी का शिकार हो रहे करोड़ों वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भले ही ग्राहक ने ऋण की अदायगी में चूक (Default) की हो, फिर भी वित्तीय संस्थानों को कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं मिल जाता। अक्सर देखा गया है कि रिकवरी एजेंट सड़कों पर चलते वाहनों को जबरन रोक लेते हैं, चालकों के साथ बदसलूकी करते हैं या बिना पूर्व सूचना के गाड़ियां उठा ले जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा को असंवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि रिकवरी की पूरी प्रक्रिया कानून द्वारा निर्धारित उचित और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।
पीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह सभी बैंकों और एनबीएफसी के लिए एक सख्त और पारदर्शी नियामक ढांचा लागू करे। अदालत ने साफ किया कि अगर कोई बैंक रिकवरी एजेंटों के जरिए किसी ग्राहक के साथ बदसलूकी या बल प्रयोग करता है, तो इसके लिए संबंधित बैंक और उसके शीर्ष प्रबंधन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोन की वसूली केवल सिविल कोर्ट, ट्रिब्यूनल या कानूनन निर्धारित नोटिस की मियाद पूरी होने के बाद ही की जा सकती है।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश के आम नागरिकों को रिकवरी एजेंसियों के मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से बचाना है। कई मामलों में बाहुबलियों और बाउंसरों की मदद से गाड़ियां छीनने की घटनाएं सामने आती थीं, जिससे कई बार अप्रिय हादसे भी हुए हैं। अदालत ने कहा कि एक लोकतांत्रिक और कानून से चलने वाले समाज में इस तरह की 'कबीलाई व्यवस्था' या गुंडागर्दी की कोई जगह नहीं है। बैंकों को अपनी वित्तीय संपत्ति वसूलने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार नागरिकों के गरिमापूर्ण जीवन जीने के मौलिक अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता।
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब आरबीआई द्वारा बैंकों के लिए नए और सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है। अब बैंकों को वाहन जब्त करने से पहले ग्राहक को पर्याप्त कानूनी समय देना होगा और पुलिस को सूचित करना अनिवार्य होगा। इस फैसले से बैंकिंग सेक्टर में लोन रिकवरी के तरीकों में बड़ा सुधार आएगा और आम कर्जदारों को बैंकों के अनुचित दबाव से सुरक्षा मिलेगी।