वर्ष 2019 में श्रीलंका को दहला देने वाले भयानक ईस्टर संडे बम धमाकों के मामले में कोलंबो की विशेष तीन-सदस्यीय उच्च न्यायालय पीठ ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस नृशंस आतंकवादी हमले के 15 मुख्य दोषियों को दोषी ठहराते हुए कुल 220 साल तक की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले को श्रीलंका के न्यायिक इतिहास में पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
21 अप्रैल 2019 को हुए इन समन्वित आत्मघाती हमलों में कोलंबो, नेगोम्बो और बट्टिकलोआ के तीन प्रमुख चर्चों तथा तीन लग्जरी होटलों को निशाना बनाया गया था। इस भयानक त्रासदी में 45 विदेशी नागरिकों सहित 269 से अधिक मासूम लोगों की मौत हुई थी और 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हमले को नेशनल तौहीद जमात (NTJ) नामक स्थानीय कट्टरपंथी संगठन ने अंजाम दिया था, जिसके तार अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े पाए गए थे।
विशेष अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दोषियों ने न केवल सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान ली, बल्कि देश की संप्रभुता, सामाजिक ताने-बाने और पर्यटन पर आधारित अर्थव्यवस्था पर भी सीधा हमला किया था। लंबी सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्टों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने इन आरोपियों को हत्या, आपराधिक साजिश और आतंकवाद के विभिन्न प्रावधानों के तहत सजा सुनाई।
इस फैसले का श्रीलंका की आंतरिक राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर गहरा असर पड़ेगा। इस घटना के बाद श्रीलंका ने अपनी खुफिया प्रणाली (Intelligence Framework) और तटीय सुरक्षा में व्यापक बदलाव किए थे। अदालत के इस सख्त रुख से न केवल पीड़ित परिवारों को मानसिक ढांढस मिला है, बल्कि यह फैसला क्षेत्रीय स्तर पर पनप रहे धार्मिक कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद कड़ा संदेश भी देता है।
न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद, श्रीलंका में कई नागरिक समाज संगठन और चर्च अधिकारी अभी भी उन उच्च-स्तरीय राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं, जिनकी खुफिया चेतावनियों के बावजूद बरती गई लापरवाही के कारण यह त्रासदी घटी। फिर भी, 15 दोषियों को मिली यह सजा दक्षिण एशिया में न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करती है।