यूरोप के बालकन देश अल्बानिया (Albania) की राजधानी तिराना से आज लोकतंत्र और सुरक्षा जगत को हिला देने वाली एक बेहद हिंसक खबर सामने आई है। देश में भड़के भारी जनाक्रोश के बीच सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए संसद भवन के बाहर पुलिस कर्मियों पर सीधा हमला कर दिया और इमारतों के बाहर कुर्सियों तथा गाड़ियों में आग लगा दी।
अल्बानियाई प्रधानमंत्री एदी रामा (Edi Rama) की सख्त चेतावनियों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए प्रदर्शनकारी सड़कों पर पुलिस बल से भिड़ गए, जिसके बाद सुरक्षा बलों को वाटर कैनन और भारी आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस भयंकर हिंसा में दर्जनों पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिससे पूरे देश में आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में यूरोप के बालकन और पूर्वी हिस्सों में बढ़ती यह राजनीतिक हिंसा और अस्थिरता भारतीय निर्यात और राजनयिक संबंधों के लिए एक चिंताजनक संकेत है। यूरोपीय संघ (EU) के मुहाने पर बसे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से भारत-यूरोप आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा पर विपरीत असर पड़ता है।
इसके अलावा, यूरोप के विभिन्न हिस्सों में भारतीय छात्रों, व्यवसायियों और प्रवासियों की एक बड़ी संख्या मौजूद है। भारतीय विदेश मंत्रालय और दूतावास ने अल्बानिया और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों को विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने और सुरक्षा परामर्शों का पालन करने की हिदायत दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय महाद्वीप में बढ़ती महँगाई, भ्रष्टाचार और जीवन-यापन के संकट के कारण जनता का गुस्सा अब हिंसक विद्रोह का रूप ले रहा है, जो पश्चिमी लोकतांत्रिक प्रणालियों की विफलता को दर्शाता है।
अल्बानिया में संसद के बाहर भड़की यह आग यह साबित करती है कि आर्थिक बदहाली और राजनीतिक गतिरोध किस तरह किसी भी देश की कानून-व्यवस्था को चुटकियों में तबाह कर सकते हैं।
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