यूरोपीय संघ के एक और प्रमुख देश चेक गणराज्य (Czech Republic) की ऐतिहासिक राजधानी प्राग (Prague) से आज एक बहुत बड़ी जनाक्रोश की खबर सामने आई है। सरकार द्वारा सार्वजनिक मीडिया फंडिंग और टैक्स दरों में किए गए विवादित संशोधनों के खिलाफ 50,000 से अधिक नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं। प्राग के मुख्य शहर चौराहों पर प्रदर्शनकारियों ने झंडे और बैनर लेकर सरकार के इस्तीफे की मांग की।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगहों पर तीखी झड़पें हुईं, जहाँ प्रदर्शनकारियों को घसीटकर और बल प्रयोग करके हटाया गया। यूरोपीय देशों में एक के बाद एक भड़क रहे ये जन-विद्रोह इस बात का प्रमाण हैं कि आम जनता अब सरकार की आर्थिक नीतियों और उच्च महँगाई दर को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो चेक गणराज्य और मध्य यूरोपीय देश भारत के साथ रक्षा तकनीक, ऑटोमोबाइल पुर्जों और भारी इंजीनियरिंग सामानों के बड़े साझीदार हैं। इन यूरोपीय देशों में जारी राजनीतिक हड़ताल और प्रदर्शनों से भारतीय विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Sector) को मिलने वाले कच्चे माल और तकनीकों की आपूर्ति में देरी हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, चेक गणराज्य में भारतीय आईटी विशेषज्ञों और छात्रों का एक बड़ा समुदाय कार्यरत है। इस प्रकार की राष्ट्रव्यापी तालाबंदी और सुरक्षा संकट के कारण भारतीय पेशेवरों का कामकाज और दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप की यह सुस्ती भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की गति को और अधिक धीमा कर सकती है, क्योंकि यूरोपीय सरकारें घरेलू दबावों के कारण अपनी व्यापार नीतियों को कड़ा कर रही हैं।
प्राग में उमड़ा यह जनसैलाब यह चेतावनी देता है कि पश्चिमी देशों में आर्थिक मंदी और जनता पर बढ़ता कर का बोझ अब सामाजिक व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर रहा है।
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