आज जिनेवा और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण मंच से भारत की विदेश नीति और पर्यावरण कूटनीति से जुड़ी एक बेहद सनसनीखेज और सकारात्मक खबर सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु पैनल की एक उच्चस्तरीय रिपोर्ट में भारत के 'मिशन लाइफ' (LiFE - Lifestyle for Environment) और रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपने तय समय-सीमा से कई साल पहले ही कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को कम करने के अपने लक्ष्यों को लगभग हासिल कर लिया है।
विकसित देशों द्वारा विकासशील दुनिया पर लगातार ग्रीनहाउस गैसों के नियंत्रण के लिए दबाव बनाए जाने के बीच भारत ने स्पष्ट रूप से यह रुख अपनाया है कि जलवायु न्याय (Climate Justice) और ऐतिहासिक प्रदूषण की जिम्मेदारी तय किए बिना कोई भी वैश्विक समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। भारत की इस दो टूक कूटनीतिक स्थिति को अब ग्लोबल साउथ के अधिकांश देशों का खुला समर्थन मिल रहा है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता देश की ऊर्जा स्वतंत्रता और सौर ऊर्जा (Solar Energy) के क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक कार्यों का परिणाम है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश बन चुका है और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के माध्यम से दुनिया भर के विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
आर्थिक और औद्योगिक स्तर पर, इस ग्रीन ट्रांजिशन के कारण भारत में हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen), इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सोलर मैन्युफैक्चरिंग जैसेक्टर्स में रोजगार के लाखों नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर अब भारत केवल एक दर्शक या समझौता मानने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह पूरी दुनिया को दिशा दिखाने वाला एक मुख्य मार्गदर्शक बन चुका है।
यह खबर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि वैश्विक मंचों पर भारत का बढ़ता कूटनीतिक प्रभाव और पर्यावरण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता दुनिया भर में सराही जा रही है।
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