अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और औद्योगिक जगत से आज भारत के आर्थिक विकास को लेकर एक बेहद शानदार और उत्साहवर्धक खबर सामने आई है। 'इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ मोटर वेहिकल मैन्युफैक्चरर्स' (OICA) की ताजा वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया के 'दूसरे सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजार' के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत कर लिया है, जबकि चीन इस सूची में पहले स्थान पर बना हुआ है।
पिछले एक साल में भारत में पैसेंजर कारों, कमर्शियल वाहनों और दोपहिया वाहनों की घरेलू बिक्री में रिकॉर्ड 14% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही भारत से इलेक्ट्रिक वाहनों और ऑटो पार्ट्स का निर्यात भी दुनिया के 50 से अधिक देशों में तेजी से बढ़ा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत का कद काफी ऊँचा हुआ है।
भारतीय आर्थिक परिप्रेक्ष्य में यह उपलब्धि देश के विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) और 'मेक इन इंडिया' अभियान की बहुत बड़ी सफलता है। ऑटोमोबाइल उद्योग भारत के कुल जीडीपी में लगभग 7% से अधिक का योगदान देता है और यह क्षेत्र करोड़ों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का सबसे बड़ा जरिया है।
विदेशी निवेशकों और वैश्विक कार निर्माताओं (जैसे ह्यूंदै, सुजुकी, टाटा और महिंद्रा) ने भारत में नए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) प्लांट और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में अरबों डॉलर के निवेश की घोषणा की है, जिससे देश 'ग्लोबल ईवी हब' बनने की राह पर अग्रसर है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि देश के मध्यम वर्ग की बढ़ती क्रय शक्ति और सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर किए जा रहे भारी खर्च ने ऑटोमोबाइल सेक्टर को इस ऐतिहासिक मुकाम पर पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई है।
यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक मंदी के दौर के बावजूद दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और मजबूत बाजारों में अपनी धाक जमा चुकी है।
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