यूरोपीय महाद्वीप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार यूनाइटेड किंगडम (UK) से आज आर्थिक जगत को हिला देने वाली एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) द्वारा जारी ताज़ा आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन की जीडीपी वृद्धि दर शून्य के नीचे गिरकर नकारात्मक क्षेत्र (-0.4%) में पहुँच गई है, जिससे देश में आधिकारिक रूप से 'तकनीकी मंदी' (Technical Recession) का संकट मंडराने लगा है।
महंगाई दर में लगातार रिकॉर्ड बढ़ोतरी, ऊर्जा की ऊँची कीमतों और गिरती औद्योगिक विनिर्माण क्षमता ने ब्रिटिश अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। लंदन के शेयर बाजार (FTSE) में इस रिपोर्ट के आते ही भारी गिरावट देखी गई और ब्रिटिश पाउंड (GBP) का मूल्य भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में तेजी से नीचे गिर गया।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में ब्रिटेन में गहराती यह आर्थिक मंदी भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है। भारत से यूके भेजे जाने वाले कपड़े, आईटी सेवाओं, ऑटो पार्ट्स और फार्मास्यूटिकल सामानों की मांग में बड़ी गिरावट आने की आशंका है, जिससे भारतीय व्यापारिक घरानों पर दबाव बढ़ेगा।
आर्थिक मोर्चे पर, ब्रिटेन में काम कर रहे लाखों भारतीय आईटी पेशेवरों और वहां अध्ययन कर रहे भारतीय छात्रों के लिए जीवन यापन का खर्च और रोजगार के अवसर बेहद सीमित हो सकते हैं। कई ब्रिटिश और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बजट कटौती के लिए छंटनी का सहारा ले सकती हैं।
इसके साथ ही, भारत की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों (जैसे टाटा मोटर्स, जिसके पास जेआरआर ब्रांड है) के वैश्विक राजस्व पर भी इस ब्रिटिश सुस्ती का प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है, जिससे भारतीय शेयर बाजारों में सतर्कता का माहौल है।
यह खबर यह दर्शाती है कि पश्चिमी देश किस तरह बेकाबू महंगाई और नीतिगत सुस्ती के कारण आर्थिक संकट की चपेट में आ रहे हैं, जबकि भारत जैसे विकासशील देश मजबूत आंतरिक मांग के बल पर खुद को संभाले हुए हैं।
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