देश के सबसे बड़े भू-भाग वाले राज्य राजस्थान से आज ऊर्जा और पर्यावरण जगत को गौरवान्वित करने वाली एक बेहद शानदार और रिकॉर्डतोड़ खबर सामने आई है। जैसलमेर और बीकानेर के थार मरुस्थल में स्थापित विशाल सौर पार्कों के दम पर राजस्थान ने 30,000 मेगावाट (30 GW) स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार कर इतिहास रच दिया है। इसके साथ ही राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है जिसने इतनी बड़ी मात्रा में हरित ऊर्जा उत्पादन का मुकाम हासिल किया है।
राज्य सरकार और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से मरुस्थलीय भूमि को 'क्लीन एनर्जी हब' में बदल दिया गया है। इन सौर परियोजनाओं से न केवल राजस्थान की बिजली मांग पूरी हो रही है, बल्कि यहाँ उत्पादित बिजली देश के दर्जनों अन्य राज्यों को भी ग्रिड के माध्यम से सप्लाई की जा रही है।
भारतीय आर्थिक और सामयिक परिप्रेक्ष्य में यह उपलब्धि भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। कोयले पर देश की निर्भरता कम होने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी और विदेशी कच्चे तेल का आयात बिल भी घटेगा।
औद्योगिक और रोजगार के दृष्टिकोण से, थार के रेगिस्तानी क्षेत्रों में अरबों रुपये के इस हरित निवेश ने स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। बुनियादी ढांचे के विकास, रखरखाव और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हजारों स्थानीय युवाओं को नए रोजगार मिले हैं।
प्रशासनिक मोर्चे पर, राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन और विशाल ऊर्जा भंडारण (Battery Energy Storage Systems) प्रणालियों के निर्माण के लिए दुनिया की अग्रणी ऊर्जा कंपनियों के साथ नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करेंगे।
यह गौरवशाली घटना यह साबित करती है कि भारत का रेगिस्तान अब केवल बंजर भूमि नहीं रहा, बल्कि वह देश को प्रदूषण मुक्त भविष्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला सबसे बड़ा पावरहाउस बन चुका है।
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