भारत की समुद्री सीमा और नौसेना की मारक क्षमता से जुड़ी आज की सबसे बड़ी और गौरवान्वित करने वाली सामरिक खबर अरब सागर से सामने आई है। भारतीय नौसेना के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) के फ्लाइट डेक पर फ्रांस निर्मित लड़ाकू विमान 'राफेल-एम' (Rafale Marine) ने पहली बार सफल लैंडिंग और टेक-ऑफ का लाइव-फायर ट्रायल पूरा किया है।
हाथों-हाथ अरेस्टेड लैंडिंग और स्की-जंप टेक-ऑफ के इस कठिन परीक्षण ने आईएनएस विक्रांत को दुनिया के सबसे सक्षम और घातक युद्धपोतों की कतार में ला खड़ा किया है। नौसेना प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने इस क्षण को समुद्री सुरक्षा के इतिहास का स्वर्णिम दिन बताया है।
भारतीय सामरिक परिप्रेक्ष्य में हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चीनी नौसेना की गतिविधियों के बीच आईएनएस विक्रांत पर राफेल-एम की तैनाती भारत की नौसैनिक संप्रभुता को पूरी तरह अभेद्य और अजेय बनाती है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर और अत्याधुनिक राफेल-एम जेट का यह घातक कॉम्बिनेशन किसी भी संभावित समुद्री युद्ध की स्थिति में भारत को दुश्मन पर त्वरित और विनाशकारी बढ़त प्रदान करेगा।
इसके साथ ही, नौसेना की तीनों सेनाओं के संयुक्त परिचालन (Jointness) और तटीय वायु रक्षा प्रणाली को इस परीक्षण से नया बल मिला है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
यह ऐतिहासिक सामरिक उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि भारत की नीली क्रांति और समुद्री बेड़ा अब हिंद महासागर में शांति और शक्ति का सबसे बड़ा स्तंभ बन चुका है।
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