अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के वैश्विक मंच से आज की सबसे बड़ी और धमाकेदार खबर जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक से आई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे रवैये की तीखी आलोचना करते हुए दुनिया के प्रमुख देशों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सामरिक और तात्कालिक राजनीतिक फायदों के लिए आतंकवाद के खतरों को नजरअंदाज करना पूरी दुनिया के लिए आत्मघाती साबित होगा।
जयशंकर ने बिना नाम लिए पाकिस्तान और चीन जैसे देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करने वालों और उन्हें कूटनीतिक ढाल प्रदान करने वालों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग किया जाना चाहिए। भारत का यह कड़ा रुख ऐसे समय आया है जब वैश्विक भू-राजनीति कई मोर्चों पर युद्ध और तनाव से जूझ रही है।
भारतीय कूटनीतिक परिप्रेक्ष्य में जयशंकर का यह साहसिक बयान ग्लोबल साउथ और भारत की उस जीरो टॉलरेंस नीति (Zero Tolerance Policy) को रेखांकित करता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। भारत ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर यह साबित किया है कि वह वैश्विक एजेंडा तय करने वाली अग्रणी शक्ति बन चुका है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत की इस बेबाक कूटनीति से पश्चिमी देशों और जी-20 सदस्य राष्ट्रों पर दबाव बनेगा कि वे आतंकवाद के सभी रूपों को मिटाने के लिए एक साझा और बाध्यकारी ढांचा तैयार करें।
इसके साथ ही, जयशंकर ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और ऊर्जा संकट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी भारत के निष्पक्ष रुख को मजबूती से रखा, जिसे कई देशों का खुला समर्थन मिला।
यह कूटनीतिक सफलता यह दर्शाती है कि 21वीं सदी का नया भारत वैश्विक मंचों पर अपनी शर्तों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए बिना किसी संकोच के वैश्विक महाशक्तियों की आँखों में आँखें डालकर बात करने में सक्षम है।
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