दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय इलाकों से आज तड़के प्राकृतिक तबाही की सबसे बड़ी और खौफनाक खबर आई है। भीषण चक्रवाती तूफान 'मुरासु' (Cyclone Murasu) 110 से 120 किमी/घंटे की रफ्तार वाली विनाशकारी हवाओं और मूसलाधार बारिश के साथ आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों (नेल्लोर और नेल्लूर-ओंगोल क्षेत्र) से टकरा गया है। तटीय इलाकों में सैकड़ों पेड़ और बिजली के पोल उखड़ गए हैं, जबकि कई गांव जलमग्न हो चुके हैं।
आपातकालीन स्थिति को देखते हुए भारतीय वायुसेना, नौसेना और एनडीआरएफ की 300 से अधिक बचाव टीमों को राहत कार्यों में तैनात किया गया है। एहतियात के तौर पर भारतीय रेलवे ने 9 से अधिक प्रमुख उड़ानों और रेल सेवाओं को रद्द कर दिया है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह चक्रवात देश के पूर्वी तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि फसलों के लिए बहुत बड़ी प्राकृतिक चुनौती बन चुका है। राज्य सरकारों ने लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाकर बड़े मानवीय संकट को टालने की कोशिश की है।
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि चक्रवात का असर अगले 24 घंटों तक आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और उत्तरी तमिलनाडु में भारी बारिश के रूप में जारी रहेगा।
यह खबर यह दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में तटीय राज्यों का पूर्व-चेतावनी और आपदा प्रबंधन ढांचा कितना संवेदनशील और निर्णायक हो चुका है।
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