साहित्य में कृत्रिम मेधा: मौलिकता, सर्वाधिकार और मानवीय अनुभूति..

 10 Aug 2026    5

जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में साहित्य जगत् एक अभूतपूर्व चौराहे पर खड़ा है। स्वचालित मशीनें अब न केवल व्याकरण की दृष्टि से सही वाक्य लिख सकती हैं, बल्कि छंदबद्ध कविताएँ, भावनात्मक कहानियाँ

असहमति का सिकुड़ता दायरा: JNU का रुख और अकादमिक स्वतंत्रता पर सवाल..

 10 Aug 2026    4

उमर खालिद की पुस्तक चर्चा रद्द करने पर जेएनयू के रुख पर जो विश्वविद्यालय किसी पुस्तक पर चर्चा का आयोजन नहीं कर सकता, समस्या उस पुस्तक के साथ नहीं, बल्कि स्वयं उस विश्वविद्यालय के साथ है।


‘बस्तर बोलता भी है’ - वर्तमान दौर के प्रतिरोध का प्रतीक..

 28 Nov 2020    1066

साहित्य की हर विधा अपने समय का प्रतिनिधित्व करती है. इसीलिए साहित्य केवल अपने शिल्प और कथ्य की वजह से ही नहीं बल्कि तथ्य की वजह से ऐतिहासिक दस्तावेज में भी परिवर्तित हो जाता है. ऐसी ही एक काव्य संग

स्वयं स्मृति बन गये स्मृतिलेखों के लेखक नवल..

 04 May 2020    568

कोलकाता के सुपरिचित कवि जय प्रकाश खत्री उर्फ नवल जी ने 24 अप्रैल 2020 को अपनी अंतिम सांस ली. अगले माह वे अस्सी के जाते. नवल जी पश्चिम बंगाल की दुनिया में एक सांस्कृतिक सेतु थे. अप्रस्तुत, नवागत, स्

समय, संघर्ष, साहित्य और किसान ..

 20 Apr 2017    393

किसान से जुडे किसी साहित्य की बात की जाती है तब सब के समक्ष एक ही नाम उपस्थित होता है, और वह है ''होरी''. मुंशी प्रेमचंद जी द्वारा लिखे गए उपन्यास का नायक ''होरी''.

व्यावहारिक शिक्षा शास्त्र के जनक महामना मदनमोहन मालवीय..

 03 Feb 2017    574

अध्यात्म-शिक्षा-संस्कृति-साहित्य-पत्रकारिता आदि क्षेत्रों में महामना मदनमोहन मालवीय जी का सम्पूर्ण योगदान सराहनीय रहा है. यही कारण है कि इलाहाबाद में जहां तक भी हमारी दृष्टि जाती है, मालवीय जी की प

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