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वीज़ा नियमों में सख्ती: IT कंपनियों और भारतीय पेशेवरों के सामने नया संकट

अमेरिका में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) समेत कई कंपनियों के ग्रीन कार्ड और स्थायी रोजगार (Permanent Employment) फाइलिंग पर रोक लगा दी गई है।

कल्ट करंट डेस्क
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09 Sep 2026
Solar farm during sunset

अमेरिका में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) समेत कई कंपनियों के ग्रीन कार्ड और स्थायी रोजगार (Permanent Employment) फाइलिंग पर रोक लगा दी गई है। वीजा फ्रॉड और श्रम नियमों के उल्लंघन की व्यापक जांच के तहत अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा उठाया गया यह कदम बेहद गंभीर माना जा रहा है। अमेरिका का यह कड़ा फैसला उन लाखों विदेशी आईटी पेशेवरों के लिए एक बहुत बड़ा झटका है, जो सालों से अमेरिकी सपने (American Dream) को पूरा करने और वहाँ स्थायी रूप से बसने की उम्मीद लगाए बैठे थे।

अमेरिकी सरकार की इस कार्रवाई के पीछे मुख्य कारण घरेलू श्रम बाजार की सुरक्षा और वीज़ा प्रणाली का कथित दुरुपयोग रोकना है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि कुछ बड़ी टेक और आउटसोर्सिंग कंपनियां एच-1बी (H-1B) और ग्रीन कार्ड प्रक्रियाओं के नियमों में ढील देकर कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं। धोखाधड़ी की रोकथाम के नाम पर शुरू हुई इस जांच ने अब पूरी टेक इंडस्ट्री और कॉर्पोरेट फाइलिंग सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

भारतीय आईटी क्षेत्र के लिए यह फैसला किसी बड़े संकट से कम नहीं है। भारत की प्रमुख टेक कंपनियाँ जैसे TCS, Infosys, Wipro और Cognizant बड़े पैमाने पर अपने इंजीनियरों को अमेरिकी क्लाइंट्स के प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए भेजती हैं। ग्रीन कार्ड फाइलिंग पर रोक और सख्त बैकग्राउंड चेकिंग के चलते कंपनियों के लिए अमेरिका में अपने मुख्य प्रोजेक्ट्स को चलाना और उच्च कुशल कर्मचारियों को रोके रखना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। इससे कंपनियों की परिचालन लागत (Operational Cost) और कानूनी अनुपालन का खर्च भी काफी बढ़ जाएगा।

इस फैसले का सबसे मानवीय और तनावपूर्ण पहलू उन कर्मचारियों पर पड़ रहा है जो पहले से ही अमेरिका में रह रहे हैं। कई भारतीय इंजीनियर सालों से ग्रीन कार्ड के इंतजार में (Green Card Backlog) अपने परिवारों के साथ अमेरिका में रह रहे हैं। फाइलिंग पर रोक लगने का मतलब है कि उनके वर्क परमिट के नवीनीकरण में देरी होगी और उनके बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाएगा। अनिश्चितता के इस माहौल के कारण कई प्रतिभाशाली पेशेवर अब अमेरिका छोड़कर यूरोप, कनाडा या वापस भारत लौटने पर विचार करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

यह घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक टेक परिदृश्य अब बदल रहा है। अमेरिकी नीतियों में आ रही इस कठोरता से अंततः खुद अमेरिकी टेक कंपनियों को भी नुकसान हो सकता है, क्योंकि उन्हें आसानी से उच्च कुशल प्रतिभाएँ (High-skilled Talent) नहीं मिलेंगी। भविष्य में इस संकट का एक बड़ा प्रभाव यह हो सकता है कि भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी धरती पर काम करने के बजाय 'वर्क फ्रॉम इंडिया' या ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का विस्तार करेंगी, जिससे भारत में ही उच्च स्तरीय तकनीकी नौकरियों के नए रास्ते खुलेंगे।