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कर्नाटक में मंत्री सतीश जारकीहोली पर ED के छापे: कर्नाटक राजनीति में मचा हड़कंप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक के लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ मंत्री सतीश जारकीहोली और उनकी बेटी व सांसद प्रियंका जारकीहोली से जुड़े परिसरों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की है।

कल्ट करंट डेस्क
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09 Sep 2026
Solar farm during sunset

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक के लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ मंत्री सतीश जारकीहोली और उनकी बेटी व सांसद प्रियंका जारकीहोली से जुड़े परिसरों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की है। बेंगलुरु के पॉश इलाके 'डॉलर्स कॉलोनी' स्थित मंत्री के आवास समेत लगभग 18 परिसरों की एक साथ तलाशी ली गई। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई से राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में अचानक खलबली मच गई है।  

केंद्रीय जांच एजेंसी की यह कार्रवाई धन शोधन (Money Laundering) और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी एक पुरानी जांच के सिलसिले में की गई है। सूत्रों के अनुसार, कुछ बड़े सरकारी ठेकों, संपत्ति के लेन-देन और शैल कंपनियों के जरिए संदिग्ध वित्तीय प्रवाह की जांच के बाद यह कदम उठाया गया है। ईडी की टीमें सुबह-सुबह ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की सुरक्षा में मंत्री के ठिकानों पर पहुँचीं और दस्तावेजों का निरीक्षण शुरू कर दिया।

सतीश जारकीहोली कर्नाटक की राजनीति के बेहद प्रभावशाली और मजबूत नेताओं में से एक माने जाते हैं। उनके और उनकी बेटी प्रियंका जारकीहोली (जो कि चिक्कोड़ी से सांसद हैं) के खिलाफ हुई इस छापेमारी के गहरे राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। राज्य में सत्तारूढ़ दल ने इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है और इसे विपक्षी नेताओं को मानसिक रूप से दबाने की केंद्र सरकार की राजनीतिक साजिश करार दिया है।  

दूसरी तरफ, बीजेपी और विपक्षी नेताओं का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरी तरह स्वतंत्र रूप से साक्ष्यों के आधार पर काम कर रही हैं। उनका तर्क है कि भ्रष्टाचार और अघोषित संपत्ति के मामलों में किसी भी प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति को छूट नहीं दी जा सकती। जांच एजेंसी का कहना है कि वे केवल वित्तीय साक्ष्यों के डिजिटल ट्रेल को ट्रैक कर रहे हैं और इसमें किसी तरह का राजनीतिक पूर्वाग्रह शामिल नहीं है।

कर्नाटक में हुई यह छापेमारी आने वाले दिनों में राज्य सरकार और केंद्र के बीच कूटनीतिक व राजनीतिक तनातनी को और बढ़ा सकती है। यदि ईडी को इन छापों के दौरान ठोस वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला कानूनी रूप से और गहरा सकता है, जो राज्य के प्रशासनिक कामकाज को भी प्रभावित करेगा।