भारतीय सर्राफा बाजार में आज एक नया इतिहास रच गया जब सोने और चांदी की कीमतों ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 'ऑल-टाइम हाई' का नया शिखर छू लिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजारों में सोने के दाम प्रति 10 ग्राम रिकॉर्ड ऊंचाई पर जा पहुंचे, वहीं चांदी की कीमतों में भी भारी तेजी दर्ज की गई। सर्राफा बाजार खुलते ही गहनों की दुकानों पर सन्नाटा छा गया और खरीदारों से लेकर आभूषण कारोबारियों तक के बीच हड़कंप मच गया।
सोने-चांदी की कीमतों में आई इस तूफानी तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक कारक सबसे मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति (Inflation) की आशंका और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट के कारण निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित ठिकाने पर लगाने की होड़ में हैं। जब भी वैश्विक वित्तीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बनता है, तब सोना निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प ('Safe Haven Asset') माना जाता है। इसी भारी मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बुलियन के दाम आसमान छू रहे हैं।
दामों में आए इस भारी उछाल का सीधा और बड़ा असर भारत के मध्यमवर्गीय परिवारों और शादी-विवाह वाले घरों पर पड़ा है। भारत में आभूषण न केवल सौंदर्य का साधन हैं, बल्कि परंपरा और पारिवारिक बचत का भी मुख्य हिस्सा हैं। लगन और शादियों के सीजन के बीच सोने के भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से आम ग्राहकों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। कई लोग अब नए जेवर खरीदने के बजाय पुराने सोने को बदलने या कम वजन की हल्की ज्वेलरी (Lightweight Jewelry) खरीदने के विकल्प की तलाश कर रहे हैं।
कारोबारी मोर्चे पर, आभूषण विक्रेताओं और सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि अचानक आई इस तेजी से बाजार में बिक्री पर बेहद नकारात्मक असर पड़ा है। दुकानों पर फुटफॉल काफी कम हो गया है और केवल वही लोग खरीदारी कर रहे हैं जिनके घरों में शादियां तय हैं। सर्राफा संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता नहीं आती और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा सुधार या गिरावट देखने को मिलने की संभावना बहुत कम है।
निष्कर्ष के तौर पर, सोने और चांदी की रिकॉर्ड कीमतें जहां एक तरफ देश के पुराने निवेशकों के पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ आम खरीदारों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि भारतीय सर्राफा बाजार अब पूरी तरह से वैश्विक घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय सराफा रुझानों से जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में देखना होगा कि क्या केंद्रीय बैंक और वैश्विक नीतियां बाजार को स्थिर कर पाती हैं या सोना-चांदी नए कीर्तिमान स्थापित करना जारी रखेंगे।