भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी द्विमासिक बैठक के बाद देश की ब्याज दरों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। गवर्नर शशिकांत दास ने जानकारी दी कि केंद्रीय बैंक ने मुख्य नीतिगत दर यानी 'रेपो रेट' को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला लिया है। आरबीआई ने लगातार आठवीं बार ब्याज दरों में कोई बदलाव न करके एक तरफ जहां महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने का संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक विकास की रफ्तार को मजबूती देने का काम किया है।
आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर देश के आम नागरिकों की ईएमआई (EMI) और लोन की दरों पर पड़ेगा। होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों की किश्तों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, जिससे मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो यह दर्शाता है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत ही मजबूत और सुरक्षित स्थिति में बनी हुई है।
महंगाई के मोर्चे पर बोलते हुए गवर्नर ने स्पष्ट किया कि यद्यपि मुख्य मुद्रास्फीति (Core Inflation) नियंत्रण में है, लेकिन खाद्य पदार्थों की कीमतों में मौसम के असर से होने वाले उतार-चढ़ाव पर आरबीआई की पैनी नजर बनी हुई है। जब तक खुदरा महंगाई दर पूरी तरह से 4 प्रतिशत के लक्षित दायरे में स्थायी रूप से नहीं आ जाती, तब तक मौद्रिक नीति में सतर्कता का रुख (Withdrawal of Accommodation) बनाए रखा जाएगा। बैंक का मुख्य उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित करते हुए देश में सतत विकास का माहौल बनाए रखना है।
बैंकिंग और कॉर्पोरेट जगत ने आरबीआई के इस निर्णय का व्यापक स्वागत किया है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का मानना है कि ब्याज दरों में स्थिरता रहने से कंपनियों को अपने नए निवेश और विस्तार योजनाओं (Capex) को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, घरेलू बाजार में मजबूत मांग और सेवा क्षेत्र (Services Sector) का बेहतर प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभा रहा है।
संक्षेप में, रिजर्व बैंक का यह निर्णय आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति नियंत्रण के बीच एक बेहद संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर जारी कूटनीतिक और व्यापारिक उथल-पुथल के बीच भारत की मौद्रिक नीति का यह जुझारूपन (Resilience) देश के वित्तीय बाजार को मजबूती प्रदान कर रहा है। यह फैसला भारतीय बैंकिंग क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए एक सकारात्मक और भरोसेमंद माहौल तैयार करेगा।