जापान में आयोजित होने जा रहे एशियाई खेलों की शुरुआत से ठीक पहले भारतीय खेल दल को एक बड़े प्रशासनिक संकट का सामना करना पड़ा है। जापान पहुँचे भारतीय दल के सदस्यों को जब आवास के रूप में निर्धारित क्रूज शिप पर भेजा गया, तो वहाँ अचानक 40 कमरे कम पड़ गए। इस अव्यवस्था के कारण भारत के लगभग 80 एथलीटों और कोचिंग स्टाफ को घंटों तक अपना सामान लेकर इंतजार करना पड़ा, जिससे खिलाड़ियों की तैयारियों और उनके मानसिक एकाग्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अधिकारियों ने आयोजकों के साथ समन्वय स्थापित करने की कोशिश की। पता चला कि स्थानीय खेल आयोजकों और क्रूज प्रबंधन के बीच कमरों के आवंटन को लेकर डेटा में गंभीर गफ़लत हुई थी। एशियाई खेलों के लिए आवास की भारी मांग को देखते हुए शहर के मुख्य होटलों में कमरे पहले से बुक थे, जिसके कारण एथलीटों के लिए क्रूज शिप को अस्थायी फ्लोटिंग विलेज (Floating Village) के जी में इस्तेमाल किया जा रहा था।
भारतीय दल के मुख्य कोच और एथलीटों ने इस कुप्रबंधन पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कई खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के कुछ ही दिन पहले इस तरह की असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जबकि इस समय उन्हें केवल अपने अभ्यास और विश्राम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था। एथलीटों के प्रतिनिधियों ने खेल मंत्रालय को तुरंत इस स्थिति की जानकारी दी और आयोजकों के समक्ष आधिकारिक विरोध दर्ज कराने की मांग की।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय दूतावास ने तुरंत हस्तक्षेप किया। जापानी खेल आयोजकों से आपातकालीन बैठक करके अतिरिक्त कमरों की व्यवस्था कराई जा रही है तथा कुछ एथलीटों को निकटतम फाइव स्टार होटलों में स्थानांतरित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। स्थानीय आयोजकों ने इस तकनीकी भूल के लिए भारतीय दल से लिखित में माफी मांगी है और स्थिति को जल्द से जल्द पूरी तरह से सुधारने का भरोसा दिया है।
इस घटना ने एक बार फिर बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भारतीय खिलाड़ियों के रसद (logistics) और आवास प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों से पहले अग्रिम दल (Advance Team) को भेजकर सभी व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। फिलहाल, भारतीय अधिकारी यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि इस अव्यवस्था का असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर न पड़े और उन्हें जल्द से जल्द बेहतर सुविधाएं मिल सकें।