Cult Current
समाज

देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है विश्वकर्मा पूजा: निर्माण और तकनीक का उत्सव

17 सितंबर को देशभर में निर्माण, शिल्प और वास्तुकला के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा पूरे धूमधाम और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। औद्योगिक क्षेत्रों, कारखानों, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप्स, निर्माण स्थलों और तकनीकी संस्थानों में

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
17 Sep 2026
Solar farm during sunset

17 सितंबर को देशभर में निर्माण, शिल्प और वास्तुकला के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा पूरे धूमधाम और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। औद्योगिक क्षेत्रों, कारखानों, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप्स, निर्माण स्थलों और तकनीकी संस्थानों में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस दिन कारीगर, इंजीनियर, शिल्पकार और मजदूर अपने औजारों, मशीनों और वाहनों की सफाई कर उनकी पूजा करते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला निर्माता और महान वास्तुकार माना जाता है, जिन्होंने इंद्रपुरी, द्वारका, हस्तिनापुर और लंका जैसे ऐतिहासिक नगरों का निर्माण किया था। यही कारण है कि यह त्योहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मानव श्रम, कौशल (Skill) और तकनीकी प्रगति का जश्न मनाने वाला एक अनूठा सांस्कृतिक पर्व है।

व्यापारिक और औद्योगिक दृष्टिकोण से विश्वकर्मा पूजा का अत्यधिक महत्व है। कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में आज के दिन कामकाज स्थगित रखकर मशीनों की सुरक्षा और सुचारू संचालन के लिए प्रार्थना की जाती है। देश के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और असम में इस अवसर पर विशाल पंडाल सजाए गए हैं और श्रमिकों के बीच प्रसाद वितरण व भंडारे आयोजित किए जा रहे हैं।  

'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया' और 'कौशल विकास' (Skill India) के वर्तमान दौर में इस त्योहार की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। देश की आर्थिक प्रगति में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले श्रमिकों और तकनीशियनों के योगदान को सम्मानित करने का यह एक सबसे बड़ा सामाजिक मंच है। विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों में आज के दिन उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जा रहा है।

संक्षेप में, विश्वकर्मा पूजा का यह पावन अवसर हमें याद दिलाता है कि किसी भी देश का निर्माण वहां की तकनीक, कड़ी मेहनत और कारीगरी के बिना संभव नहीं है। यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और आधुनिक तकनीकी आत्मनिर्भरता के सुंदर संगम का संदेश पूरे समाज को देता है।