हॉकी इंडिया (Hockey India) में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा भूचाल आया है, जहां शासी निकाय ने अपने महानिदेशक (Director General) आरके श्रीवास्तव के सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से छीन लिए हैं। यह कड़ा फैसला हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति की एक आपातकालीन बैठक में लिया गया। संस्था के भीतर लंबे समय से चल रहे आंतरिक विवादों, कथित अनुशासनहीनता और कार्यप्रणाली में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरके श्रीवास्तव पर आरोप था कि वे राष्ट्रीय टीमों के चयन, कोचिंग स्टाफ की नियुक्ति और प्रायोजन (sponsorship) से जुड़े मामलों में मनमाने ढंग से फैसले ले रहे थे। कार्यकारिणी के कई सदस्यों ने उनके कामकाज के तरीके पर आपत्ति जताई थी और आरोप लगाया था कि वे निर्वाचित पदाधिकारियों को दरकिनार कर प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे थे। इन शिकायतों की समीक्षा के बाद समिति ने सर्वसम्मति से उनके अधिकार निलंबित करने का निर्णय लिया।
इस फैसले के साथ ही हॉकी इंडिया ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। जांच पूरी होने और रिपोर्ट सौंपे जाने तक महानिदेशक के सभी दैनिक कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संस्था के सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त प्रभार में ट्रांसफर कर दिया गया है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि खेल और खिलाड़ियों के हित से ऊपर कोई नहीं है और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इस प्रशासनिक फेरबदल का असर भारतीय हॉकी टीमों के आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों और प्रशिक्षण शिविरों पर न पड़े, इसके लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। संस्था ने आश्वासन दिया है कि पुरुष और महिला टीमों के कोच और खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाएं और बजट पूर्ववत जारी रहेंगे। हालांकि, खेल विश्लेषकों का मानना है कि महासंघ के शीर्ष स्तर पर चल रही इस खींचतान का असर खेल के प्रबंधन पर पड़ सकता है।
आरके श्रीवास्तव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने हमेशा भारतीय हॉकी के विकास और बेहतरी के लिए नियमों के तहत काम किया है। वे इस फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं। भारतीय खेल जगत में इस घटनाक्रम को खेल संघों में सुधार और स्वायत्तता बनाम जवाबदेही की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।