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सिम कार्ड धोखाधड़ी रोकने के लिए सख्त नए दूरसंचार नियम

दूरसंचार विभाग (DoT) ने साइबर अपराधों और सिम आधारित धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए नए और बेहद सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार,

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
23 Sep 2026
Solar farm during sunset

दूरसंचार विभाग (DoT) ने साइबर अपराधों और सिम आधारित धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए नए और बेहद सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर या धोखे से सिम कार्ड जारी करवाता है या दूसरों के नाम पर सक्रिय सिम का अवैध उपयोग करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। यह कदम देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सुरक्षा एजेंसी और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (TSPs) को निर्देश दिया गया है कि वे पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) एजेंटों के सत्यापन की प्रक्रिया को शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक और एआई-आधारित बनाएं। अब किसी भी सिम कार्ड के वितरण से पहले विक्रेता का पूर्ण पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। फर्जीवाड़ा करने वाले एजेंटों को तुरंत ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाएंगे।

इसके अलावा, दूरसंचाार विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम 'ASTR' (ASTR - AI Based Facial Recognition) के उपयोग को और व्यापक बना दिया है। यह प्रणाली एक ही तस्वीर या जाली दस्तावेजों का उपयोग करके अलग-अलग नामों से निकाले गए बल्क सिम कार्डों की पहचान करने में सक्षम है। इस तकनीक के माध्यम से अब तक लाखों फर्जी कनेक्शन काटे जा चुके हैं और कई अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश हुआ है।

आम नागरिकों के लिए अपने नाम पर जारी फर्जी कनेक्शनों का पता लगाना अब आसान बना दिया गया है। 'संसार साथी' (Sanchar Saathi) पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ता यह जांच सकते हैं कि उनके आधार या पहचान पत्र पर कुल कितने मोबाइल नंबर चालू हैं। यदि वे किसी ऐसे नंबर को देखते हैं जिसे उन्होंने स्वयं नहीं खरीदा है, तो वे तुरंत पोर्टल से ही उसकी रिपोर्ट दर्ज कराकर उसे बंद करवा सकते हैं।

साइबर सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह नया ढांचा भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैंक फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन घोटालों में मुख्य रूप से फर्जी सिम कार्ड का ही उपयोग होता था। इन नए कड़े कानूनों और तकनीकी निगरानी से साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर सीधा प्रहार होगा और डिजिटल लेनदेन में जनता का विश्वास मजबूत होगा।