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लातविया सीमा पर रूसी सेना

उत्तर-पूर्वी यूरोप की सीमा पर अचानक बहुत बड़ा सैन्य तनाव पैदा हो गया है। नाटो (NATO) के सदस्य देश लातविया की सीमा के ठीक पास रूस ने अपने हजारों सैनिकों, बख्तरबंद टैंकों और उन्नत एयर-डिफेंस मिसाइल सिस्टम की नई और बड़ी तैनाती कर दी है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
14 Oct 2026
Solar farm during sunset

उत्तर-पूर्वी यूरोप की सीमा पर अचानक बहुत बड़ा सैन्य तनाव पैदा हो गया है। नाटो (NATO) के सदस्य देश लातविया की सीमा के ठीक पास रूस ने अपने हजारों सैनिकों, बख्तरबंद टैंकों और उन्नत एयर-डिफेंस मिसाइल सिस्टम की नई और बड़ी तैनाती कर दी है। क्रेमलिन की इस अप्रत्याशित सैन्य घेराबंदी ने पश्चिमी देशों के रक्षा मंत्रालयों में हड़कंप मचा दिया है और बाल्टिक क्षेत्र में युद्ध का खतरा गहरा गया है।

नाटो के शीर्ष सैन्य कमांडरों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए लातविया, लिथुआनिया और एस्टोनिया में अपने 'रैपिड रिएक्शन फोर्स' को उच्चतम रेड अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है। वाशिंगटन और ब्रसेल्स में आपातकालीन सुरक्षा बैठकें बुलाई गई हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि नाटो की एक इंच जमीन पर भी कोई हमला हुआ तो उसे पूरे 32 सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा और इसका करारा जवाब दिया जाएगा।

सीमा पर तनाव बढ़ने के कारण लातवियाई सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकाल (State of Emergency) घोषित कर दिया है और अपने नागरिकों को सुरक्षित इलाकों में स्थानांतरित होने के निर्देश जारी किए हैं। बाल्टिक सागर में भी रूसी और नाटो युद्धपोत एक-दूसरे के बेहद करीब गश्त लगा रहे हैं, जिससे किसी भी छोटी दुर्घटना के महायुद्ध में बदलने का गंभीर जोखिम उत्पन्न हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि उत्तरी यूरोप में इस नए मोर्चे के खुलने से यूरोपीय अर्थव्यवस्था फिर से बड़े संकट में फंस सकती है। बाल्टिक समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार पर असर पड़ने लगा है और यूरोपीय वित्तीय बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य: भारत के लिए पूर्वी यूरोप में तनाव का कोई भी नया केंद्र बनना वैश्विक स्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला के दृष्टिकोण से चिंताजनक है। भारत के यूरोप के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध बहुत मजबूत हैं और इस नए संघर्ष से लॉजिस्टिक्स तथा माल ढुलाई के खर्च में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर गहराई से नजर बनाए हुए है। भारत ने हमेशा सभी पक्षों से सीमाओं के सम्मान और कूटनीतिक बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने का आह्वान किया है। भारत का मुख्य ध्यान अपने निर्यातकों के हितों की रक्षा करने और वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनाए रखने पर है।

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