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पश्चिमी घाट में मेगा प्रोजेक्ट

देश के पर्यावरण, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और पश्चिमी घाट (Western Ghats) की जैव-विविधता से जुड़ी आज की सबसे विवादित और सनसनीखेज खबर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले से सामने आई है। टॉरेंट पावर द्वारा कर्जत में प्रस्तावित ₹13,505 करोड़

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
02 Nov 2026
Solar farm during sunset

देश के पर्यावरण, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और पश्चिमी घाट (Western Ghats) की जैव-विविधता से जुड़ी आज की सबसे विवादित और सनसनीखेज खबर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले से सामने आई है। टॉरेंट पावर द्वारा कर्जत में प्रस्तावित ₹13,505 करोड़ की लागत वाले 3,000 मेगावाट के विशाल 'पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट' को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

पर्यावरण रिपोर्टों के अनुसार, सह्याद्री पर्वत श्रृंखला के नाजुक बफर जोन में बनने वाले इस विशाल ऊर्जा संयंत्र के लिए 377 हेक्टेयर से अधिक प्राकृतिक भूमि की आवश्यकता होगी और 32,000 से अधिक हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जाएगी।

भारतीय सामाजिक और पर्यावरणीय परिप्रेक्ष्य में 'क्लीन एनर्जी विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण' का यह संघर्ष पूरे देश का ध्यान खींच रहा है। पश्चिमी घाट दुनिया के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्रों में से एक है, जहाँ इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से भूस्खलन और जैव-विविधता के विनाश का खतरा गहरा गया है।

स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने प्रोजेक्ट के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए केंद्र और राज्य सरकार से इस परियोजना के री-ऑडिट की मांग की है।

कंपनी का दावा है कि यह परियोजना राज्य की ऊर्जा सुरक्षा और पीक-अवर बिजली आपूर्ति के लिए क्रांतिकारी होगी, लेकिन पेड़ों की बलि देने की कीमत पर विकास का यह मॉडल बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

यह खबर यह दर्शाती है कि हरित ऊर्जा (Clean Energy) लक्ष्यों को हासिल करने की होड़ में भी देश के दुर्लभ प्राकृतिक जंगलों और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना कितना बड़ा यक्ष प्रश्न बन चुका है।

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