मध्य पूर्व की रणनीतिक धुरी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र इजरायल से आज सुबह एक बेहद सनसनीखेज और अनिश्चितता से भरी चुनावी खबर आई है। इजरायल में संपन्न हुए आम चुनावों के नतीजों में 120 सीटों वाली 'नेसेट' (Knesset) में पूर्ण त्रिशंकु संसद (Hung Parliament) की स्थिति पैदा हो गई है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन ने 53 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें हासिल हुई हैं। बहुमत के लिए आवश्यक 61 सीटों के जादुई आंकड़े तक कोई भी दल नहीं पहुँच सका है, जिसके बाद इजरायल में एक बार फिर भयंकर राजनीतिक गतिरोध और गठबंधन सरकार बनाने की जोड़-तोड़ शुरू हो गई है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य और खाड़ी क्षेत्र की शांति की दृष्टि से इजरायल में राजनीतिक स्थिरता का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्य पूर्व में जारी सुरक्षा संकट के बीच तेल अवीव में निर्णय लेने वाली एक मजबूत सरकार का न होना क्षेत्र में कूटनीतिक शांति प्रयासों को धीमा कर सकता है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे क्षेत्रीय दलों और स्वतंत्र सांसदों की भूमिका अब सरकार के गठन में सबसे निर्णायक हो गई है, जिससे रक्षा और विदेश नीतियों पर अनिश्चितता का साया मंडरा रहा है।
यह सनसनीखेज अंतरराष्ट्रीय मोड़ यह दर्शाता है कि दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक में कूटनीतिक और सैन्य नियंत्रण की चाबी अगले कुछ दिनों तक अनिश्चित राजनीतिक मोलभाव पर टिकी रहेगी।
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