अफ्रीकी महाद्वीप के रणनीतिक देश सोमालिया, उसके संवैधानिक इतिहास और वैश्विक लोकतंत्र के पटल से आज की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय कानूनी खबर आई है। सोमालिया के सुप्रीम कोर्ट ने देश के राष्ट्रपति को एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक झटका देते हुए आगामी 90 दिनों के भीतर पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराने का कड़ा न्यायिक आदेश जारी कर दिया है।
राष्ट्रपति द्वारा चुनाव टालने और अपने कार्यकाल के विस्तार के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय की फुल बेंच ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के दायरे से बाहर जाकर शासन करना पूरी तरह अवैध है और देश में लोकतान्त्रिक व्यवस्था की बहाली के लिए तय समय-सीमा के भीतर आम चुनाव कराना अनिवार्य है।
सोमालिया के इस ऐतिहासिक अदालती फैसले का अंतरराष्ट्रीय समुदाय, अफ्रीकी संघ (African Union) और संयुक्त राष्ट्र ने व्यापक स्वागत किया है। गृहयुद्ध और आतंंकी चुनौतियों से जूझ रहे सोमालिया के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह रुख न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का एक सबसे बड़ा मिसाल बन गया है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में अदालत के इस 90-दिवसीय चुनावी आदेश के बाद देश में चुनाव आयोग को तत्काल प्रभाव से सक्रिय कर दिया गया है। विभिन्न विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने फैसले को देश में लोकतंत्र की नई सुबह करार दिया है और शांतिपूर्ण चुनाव कराने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
यह ऐतिहासिक न्यायिक मील का पत्थर यह सिद्ध करता है कि दुनिया के सबसे संकटग्रस्त इलाकों में भी एक स्वतंत्र और मजबूत न्यायपालिका देश के संविधान की रक्षा करके तानाशाही प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने और लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने में सबसे निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
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